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दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक समूह ओपेक जल्द ही तेल उत्पादन कोटा में तीसरी बार वृद्धि करने के लिए सहमत हो सकता है। सूत्रों की मानें तो यह कदम युद्ध समाप्ति के बाद आपूर्ति बढ़ाने की तत्परता का संकेत देगा।

हाल की वैश्विक आर्थिक स्थिरता और तेल की मांग में लगातार बदलाव के मद्देनजर, ओपेक सदस्यों ने उत्पादन नीतियों का पुनरावलोकन किया है। समूह की बैठक में यह मुद्दा प्रमुख रूप से चर्चा का विषय रहा, जहां तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने और बाजार में संतुलन बनाए रखने के लिए कदम उठाने की योजना बनाई गई।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में तनाव की वजह से तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे में समूह यह साफ संदेश देना चाहता है कि युद्ध प्रभावित क्षेत्र से हालात सामान्य होते ही वे आमदनी बढ़ाने तथा मांग को पूरा करने के लिए तैयार हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ओपेक उत्पादन कोटा बढ़ाने पर सहमत होता है, तो इससे वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है। यह कदम ऊर्जा क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है क्योंकि इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा।

इससे पहले, समूह ने Hormuz जलसंधि बंद होने के बाद दो बार उत्पादन कोटा बढ़ाया था ताकि तेल आपूर्ति प्रभावित न हो। वर्तमान प्रस्तावित तीसरी बढ़ोतरी के तहत, सदस्य देश युद्ध समाप्ति के संकेत मिलने पर तुरंत उत्पादन में वृद्धि करने के लिए तैयार हैं।

ओपेक के करीबी अधिकारीयों ने बताया कि यह रणनीति समूह की सदस्य देशों की आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है और इससे वे वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत रखते हैं।

आगामी बैठक में औपचारिक निर्णय लिया जाना है, जिसके बाद ही विश्व बाजार में इस संबंध में अंतिम प्रभाव पड़ेगा। तेल की मांग बढ़ने और युद्ध के खत्म होने की स्थिति में, ओपेक की यह पहल वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में संतुलन बनाए रखने में सहायक होगी।

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