Headline
Udayagiri – An Ancient Buddhist Heritage Site in Odisha
उदयगिरी – ओडिशा में एक प्राचीन बौद्ध विरासत स्थल
The story and science behind Ferris wheels
फेरिस व्हील: कहानी और विज्ञान की झलक
Story of Valmiki
वाल्मीकि की कहानी
'Blatant act of aggression': India strongly condemns Pakistan air strikes on Afghan territory
‘खुला हमला’: भारत ने अफगान क्षेत्र में पाकिस्तान के हवाई हमलों की कड़ी निंदा की
Former ISRO scientist Mayilsamy Annadurai to lead panel to overhaul TN school curriculum
पूर्व इसरो वैज्ञानिक मेयिलसामी अन्नादुरई तमिलनाडु स्कूल पाठ्यक्रम सुधार करने वाली कमेटी के प्रमुख बने
My father stayed underground for 19 months during Emergency, recalls P.V.N. Madhav
आपातकाल के दौरान मेरे पिता 19 महीने भूमिगत रहे, याद करते हैं पी.वी.एन. माधव
Lydian Nadhaswaram unveils his Symphony No. 1 – New Beginnings
लिडियन नाधस्वरम ने अपनी सिम्फनी नंबर 1 – नई शुरुआत का अनावरण किया
Sooryavanshi must 'bide his time and wait,' says ten Doeschate
सूर्यवंशी को ‘अपना समय आने तक इंतजार करना होगा,’ कहते हैं टेन डोएशेट
Interview | Steve Brusatte on why India could be the world’s next dinosaur hotspot
साक्षात्कार | स्टीव ब्रुसेट ने बताया क्यों भारत हो सकता है दुनिया का अगला डायनासोर हॉटस्पॉट
Syphilis cases in expectant mothers have dramatically risen since the pandemic – here’s what’s driving the trend

महामारी के दौरान और इसके बाद गर्भवती महिलाओं में सिफिलिस के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। यह गंभीर संक्रमण, जो जन्म के समय शिशु को गंभीर समस्याओं से प्रभावित कर सकता है, एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, जन्मजात सिफिलिस (congenital syphilis) की रोकथाम के लिए गर्भावस्था के दौरान सार्वभौमिक स्क्रीनिंग सबसे प्रभावी तरीका है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने गर्भवती सभी महिलाओं के लिए तीन समय पर स्क्रीनिंग करने की सिफारिश की है: पहली तिमाही, तीसरी तिमाही, और प्रसव के समय। यह प्रक्रिया समय से पहले संक्रमण की पहचान कर उचित इलाज को संभव बनाती है, जिससे शिशु में सिफिलिस के कारण होने वाली जटिलताओं को रोकना संभव हो जाता है।

डॉ. सीमा अग्रवाल, एक प्रसूति विशेषज्ञ, बताती हैं कि “समान्यतः, गर्भावस्था के दौरान सिफिलिस परीक्षण को प्राथमिकता नहीं दी जाती थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान ने इस संक्रमण के प्रसार को बढ़ावा दिया है। इसका परिणाम गर्भवती महिलाओं में नए मामलों की बढ़ती संख्या के रूप में सामने आया है।”

सिफिलिस एक यौन संचारित रोग है, लेकिन यदि इसे गर्भावस्था के दौरान सही समय पर नहीं पहचाना गया और इलाज नहीं किया गया, तो इससे गर्भस्थ शिशु को गंभीर शारीरिक और मानसिक विकार हो सकते हैं, यहां तक कि मृत जन्म का भी खतरा रहता है। इसलिए, सरकारी और निजी अस्पतालों में इस बीमारी के परीक्षण को नियमित रूप से शामिल करना अनिवार्य हो गया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इसकी गंभीरता को देखते हुए सभी प्रसूति केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के लिए नि:शुल्क सिफिलिस परीक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, “हमारी प्राथमिकता है कि सभी गर्भवती महिलाएं तीन महत्वपूर्ण पड़ावों पर स्क्रीनिंग कराएं ताकि संक्रमण जल्दी पकड़ा जा सके और समय पर उपचार सुनिश्चित हो।”

विशेषज्ञों का सुझाव है कि गर्भवती महिलाओं को स्वयं भी इस संक्रमण के प्रति सजग रहना चाहिए, सुरक्षित यौन संबंध बनाए रखें और नियमित चिकित्सकीय जांच कराएं। इसके साथ ही, जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में इस रोग की पहचान और उपचार के प्रति उचित जानकारी पहुंचाना भी जरूरी है।

अंततः, कोरोनाकाल के बाद स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों में आई कमजोरी के बावजूद, सिफिलिस जैसे संक्रमणों को नियंत्रित करने के लिए सामूहिक प्रयास और जागरूकता फैलाना बेहद महत्वपूर्ण है। गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच और उपचार से न केवल माताओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा बल्कि आने वाले पीढ़ी का भी उज्जवल भविष्य सुनिश्चित होगा।

Source