हैदराबाद। तेलंगाना राज्य की कैबिनेट ने भूमि पंजीकरण शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। इस निर्णय का उद्देश्य राज्य की राजस्व बढ़ोतरी के साथ-साथ पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। प्रस्तावित संशोधन के तहत भूमि पंजीकरण शुल्क में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की जाएगी, जो किसानों और भूमि मालिकों के लिए महत्वपूर्ण परिवर्तनों का संकेत है।
कैबिनेट मीटिंग में यह भी निर्णय लिया गया कि थर्मल पावर परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपा जाएगा। इससे राज्य सरकार भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी पर कड़ा प्रहार करने का संदेश दे रही है। अधिकारियों ने बताया कि इस संदर्भ में हुई प्रारंभिक जांच से गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिन्हें उच्च स्तरीय जांच के लिए CBI को भेजा जा रहा है।
भूमि पंजीकरण शुल्क में बदलाव राज्य के नागरिकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह प्रभावित करेगा कि किस प्रकार से लोग अपनी भूमियों की पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करते हैं। भूमि पंजीकरण शुल्क के संशोधन का उद्देश्य अधिक वास्तविक बाजार मूल्यांकन के आधार पर शुल्क निर्धारित करना है, ताकि पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान धोखाधड़ी को रोका जा सके और सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए शुल्क संरचना के तहत गरीब और सीमांत किसानों के लिए कुछ छूट का प्रावधान रखा जाएगा ताकि वे आर्थिक रूप से प्रभावित न हों। कैबिनेट ने इस दिशा में नीति बनाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन भी किया है, जो जल्द ही विस्तृत मार्गदर्शन जारी करेगी।
थर्मल पावर परियोजनाओं की अनियमितताओं की जांच के संदर्भ में, राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जांच रिपोर्ट के आधार पर कड़े कदम उठाने का संकल्प लिया है। इस कदम को राज्य में शासन और प्रशासन की जवाबदेही सुधारने के लिए बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भूमि पंजीकरण शुल्क में वृद्धि से शुरुआती चरण में कुछ असंतोष देखने को मिल सकता है, लेकिन इससे राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और लंबी अवधि में भूमि लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ेगी। वहीं, CBI की जांच से प्रशासन में सुधार और भ्रष्टाचार कम होने की उम्मीद है।
सरकार ने जनता से यह अपील भी की है कि वे पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता से करें, तथा किसी भी अनियमित घटना की सूचना संबंधित अधिकारियों को तुरंत दें। इस बदलाव के साथ, तेलंगाना राज्य एक नई आर्थिक दिशा की ओर बढ़ रहा है, जिसमें सर्वसाधारण के हित और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों का ध्यान रखा जा रहा है।

