Headline
G7 leaders tackle reliance on China for critical minerals
G7 नेता चीन पर निर्भरता कम करने के लिए समावेशी रणनीति पर विचार कर रहे हैं
Ageing population and rising debt could push Tamil Nadu towards a fiscal trap, says White Paper
बढ़ती उम्रदराज आबादी और बढ़ता ऋण तामिलनाडु को आर्थिक जाल में फंसाने का खतरा: व्हाइट पेपर
Heatwaves and ozone together increase India’s cardiac deaths: study
भारत में गर्मी की लहर और ओजोन के कारण हृदय रोग से मौतों में वृद्धि: अध्ययन
‘Shrek 5’ trailer: Shrek and Donkey reunite for a new adventure
शेरेक 5 ट्रेलर: शेरेक और डंकी फिर साथ नए रोमांच के लिए
Hindu prayers made mandatory in Chhattisgarh’s State schools; govt imposing RSS agenda, says Congress
छत्तीसगढ़ के राज्य विद्यालयों में हिंदू प्रार्थनाएँ अनिवार्य; कांग्रेस ने कहा- सरकार आरएसएस एजेंडा लागू कर रही है
Glenmorangie’s single malt Scotch whisky, Lasanta, arrives in Kolkata
ग्लेनमोरांगी का सिंगल माल्ट स्कॉच व्हिस्की, लसांता, कोलकाता में लॉन्च
Stock markets extend rally in early trade on drop in crude oil prices
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के साथ स्टॉक मार्केट में तेजी जारी
Hoarding row erupts ahead of Rahul Gandhi’s Kota event, Gehlot alleges BJP ‘fear’
राहुल गांधी के कोटा कार्यक्रम से पहले होर्डिंग विवाद, गहलोत ने भाजपा पर ‘डर’ का आरोप लगाया
Recovery of Ebola patients offers rare moments of joy at epicentre of outbreak
इबोला मरीजों के ठीक होने से महामारी के केंद्र में मिल रहे हैं खुशी के अनमोल पल
How dual-use satellites are blurring the lines of modern space war

1967 का बाहरी अंतरिक्ष संधि एवं अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून युद्ध के दौरान नागरिक और सैन्य लक्ष्यों के बीच स्पष्ट भेद करने पर जोर देता है। यह सिद्धांत युद्धरत पक्षों को नागरिक वस्तुओं और सैन्य लक्ष्यों के बीच अंतर करने की जिम्मेदारी देता है। लेकिन आधुनिक समय की तकनीकी प्रगति ने इस प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना दिया है, खासकर जब बात आती है द्वैत-उपयोग (dual-use) उपग्रहों की।

द्वैत-उपयोग उपग्रह वे उपकरण हैं जिन्हें एक ही समय में सैन्य और नागरिक दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, कोई उपग्रह संचार, मौसम विज्ञान और विशेषज्ञ सैटेलाइट इमेजिंग के लिए संचालित हो सकता है, साथ ही युद्ध प्रबंधन, टोही और सैन्य संचार में भी। इस प्रकार के उपग्रह युद्ध के नियमों के तहत पारंपरिक लक्ष्यों की परिभाषा को चुनौती देते हैं क्योंकि वे स्पष्ट रूप से सिर्फ सैन्य या सिर्फ नागरिक नहीं होते।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और युद्ध के नियम, विशेषकर आत्मरक्षा की स्थिति में सैन्य कार्रवाई करते समय, नागरिकों और नागरिक वस्तुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देते हैं। लेकिन द्वैत-उपयोग उपग्रह इस सुरक्षा कवच को कमजोर कर सकते हैं। यदि एक उपग्रह का कोई हिस्सा या पूरा उसे सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाए, तब क्या वह पूरा उपग्रह हमला करने योग्य लक्ष्य बन जाता है? इस प्रश्न का उत्तर सरल नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक अंतरिक्ष युग में द्वैत-उपयोग उपग्रह सुरक्षा नियमों और अंतरिक्ष संधि के सिद्धांतों के बीच तनाव पैदा कर रहे हैं। इसके कारण, वॉरफेयर की नई रणनीतियों, नीति निर्धारण, और कानूनी ढांचे की पुनः समीक्षा आवश्यक हो गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंतरिक्ष में कोई भी सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप हो और अनावश्यक नागरिक नुकसान से बचा जा सके।

साथ ही, देशों को भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और पारदर्शिता बरतने की आवश्यकता है ताकि ये उपकरण युद्ध के अंतर्गत कब और कैसे लक्षित किए जा सकते हैं, इस सवाल पर दो तरफा समझौता हो सके। युद्ध के नियमों के तहत अधिक स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाने से ही आधुनिक द्वैत-उपयोग उपग्रहों की जटिलताओं से निपटा जा सकेगा।

संक्षेप में, द्वैत-उपयोग उपग्रह आधुनिक अंतरिक्ष युद्ध की सीमा रेखाओं को धुंधला कर रहे हैं और इस समय अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक बड़ा कानूनी तथा नीतिगत सवाल खड़ा कर रहे हैं। इसके समाधान के लिए बहुपक्षीय प्रयास और नए अंतरिक्ष युद्ध नियमों का निर्माण अनिवार्य है। यही तरीका है जिससे हम भविष्य के अंतरिक्ष संघर्षों को अधिक सुरक्षित और न्यायसंगत बना सकते हैं।

Source