वेनिस बिएनाले में अपनी नई कृति के माध्यम से प्रसिद्द कलाकार नलिनी मलानी ने उस पितृसत्तात्मक व्यवस्था की गहन जांच की है, जिसमें महिलाओं के खिलाफ हिंसा को वैधता प्रदान की जाती है। यह प्रदर्शनी इस सामाजिक समस्या पर विचार-विमर्श और जागरूकता बढ़ाने का एक मंच प्रस्तुत करती है।
नलिनी मलानी की यह कलाकारिता सामाजिक न्याय के विषयों को केंद्र में रखती है, और इस बार उनका फोकस विशेष रूप से महिलाओं की हिंसा पर रहा है, जो पितृसत्तात्मक संरचनाओं के कारण प्रबल होती है। उन्होंने इस विषय को अपनी कला के माध्यम से इस कदर सजगता और सजीवता से प्रस्तुत किया है कि यह दर्शकों के मन में गहरे प्रभाव छोड़ती है।
उनकी इस कृति में यह साफ झलकता है कि कैसे सामाजिक और सांस्कृतिक नियम महिलाओं के प्रति हो रहे अमानवीय व्यवहार को संरक्षित करते हैं। मलानी की कला में हिंसा एक बार फिर से एक बहस का विषय बनती है जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करने के साथ-साथ बदलाव की पहल करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
वेनिस बिएनाले के जैसे महत्वपूर्ण मंच पर इस विषय को उठाना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा को समझने और उसके विरुद्ध जागरूकता फैलाने का एक बड़ा अवसर प्रदान करता है। नलिनी मलानी ने इस प्रदर्शनी के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि सांस्कृतिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में परिवर्तन के बिना महिलाएं सुरक्षित नहीं हो सकतीं।
आलोचकों का मानना है कि नलिनी मलानी की यह नवीनतम कृति न केवल कला की दृष्टि से बल्कि सामाजिक सरोकारों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। यह महिला हाशिएकरण और उनकी संवेदनाओं की अनदेखी पर एक तीखा पैरोकार है। उनकी प्रदर्शनी ने यह सिद्ध किया है कि कला सामाजिक परिवर्तन का एक प्रभावी माध्यम हो सकती है।
नालिनी मलानी की इस प्रस्तुति से पाठक और दर्शक दोनों के दिलों दिमाग में एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए आवश्यक चिंतन और संवाद शुरू होने की संभावनाएं उत्पन्न होती हैं। यह प्रदर्शनी महिला अधिकारों के प्रति समर्पित संगठनों और व्यक्तिगत सोच दोनों के लिए प्रेरणादायक भूमिका निभाने की क्षमता रखती है।

