प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई 2026 को देशवासियों को विदेशी मुद्रा का संरक्षण करने के लिए विदेशी मुद्रा खर्च करने वाली वस्तुओं और सेवाओं की खरीद में कटौती करने की सलाह दी। उन्होंने अपने एक संबोधन में यह अपील की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में हमें अपनी राष्ट्रीय संपत्ति – विदेशी मुद्रा भंडार – की रक्षा करने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे विदेशी मुद्रा भंडार देश की आर्थिक सुरक्षा की ढाल हैं। इसलिए हमें चाहे वह वस्त्र हो, इलेक्ट्रॉनिक्स हो या अन्य कोई वस्तु, विदेशी मुद्रा खर्च को कम करना चाहिए ताकि हमारा विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रह सके।” उन्होंने साथ ही यह भी बताया कि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और देशी उत्पादों का सेवन बढ़ाना आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह सलाह अप्रत्याशित नहीं थी। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता, डॉलर की बढ़ती मांग और विश्व अर्थव्यवस्था में मंदी के संकेतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक भी विदेशी मुद्रा के संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार की मजबूती से न केवल रुपया स्थिर रहता है, बल्कि विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ता है।
देश के व्यवसायिक क्षेत्रों में इस अपील का मिश्रित प्रभाव देखा जा रहा है। कुछ उद्योग जैसे कि आयात आधारित उद्योग प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि यहां खर्च में कमी आयात घटा सकती है। वहीं, घरेलू उत्पादक और छोटे व्यवसायों को इसका लाभ मिलने की संभावना है क्योंकि अधिक लोग घरेलू उत्पाद खरीदेंगे।
सरकार ने पहले ही कई कदम उठाए हैं ताकि घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन मिले। “मेक इन इंडिया” जैसी योजनाएं लगातार चल रही हैं, और अब प्रधानमंत्री का यह संदेश इस दिशा में एक और सशक्त कदम माना जा रहा है। साथ ही, नागरिकों से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक स्थानीय उत्पादों का सेवन करें, जिससे न केवल विदेशी मुद्रा बचत होगी बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि यदि जनता इस सलाह को गंभीरता से अपनाती है, तो इससे न सिर्फ विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि देश के व्यापार घाटे को भी नियंत्रित किया जा सकेगा। यह कदम देश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
अन्ततः, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह सलाह देश के लिए एक जागरूकता का संदेश है, जो आर्थिक स्थिरता और विकास की दिशा में एक साझा प्रयास की जरूरत को दर्शाती है। देशवासियों से अपेक्षा है कि वे अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव कर इस दिशा में योगदान दें।
