नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2026 (FY26) वह पहला पूर्ण वर्ष साबित होगा जब सिंगापुर एयरलाइंस (SIA) को एयर इंडिया के घाटों को सहन करना पड़ा। सिंगापुर एयरलाइंस ने एयर इंडिया-विस्तारा के विलयित इकाई में 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की है, जिससे उसकी वित्तीय रिपोर्ट पर इसका स्पष्ट प्रभाव देखा जा रहा है।
एयर इंडिया ने इस अवधि के दौरान सिंगापुर एयरलाइंस पर लगभग 743 मिलियन अमेरिकी डॉलर का नकारात्मक प्रभाव डाला, जिससे SIA के शुद्ध लाभ में बहुत बड़ी गिरावट आई है। FY26 की समाप्ति तक, सिंगापुर एयरलाइंस का मुनाफा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 57 प्रतिशत तक घट गया।
विश्लेषकों का मानना है कि एयर इंडिया के वित्तीय तंगी के कारण, जिसने दशकों से घाटा बनाये रखा है, सिंगापुर एयरलाइंस की पूंजी लगाने और कारोबार को स्थिर करने की कोशिशों पर दबाव पड़ा है। यह विलय क्षेत्रीय विमानन को पुनः संगठित करने के लिए एक रणनीतिक कदम था, लेकिन वित्तीय नुकसान अब भी इसकी प्रमुख चुनौतियों में से एक बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एयर इंडिया-विस्तारा के विलय के बाद यह कदम सिंगापुर एयरलाइंस के लिए दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए, हालांकि अभी उसे अल्पकालिक वित्तीय दबावों का सामना करना पड़ रहा है। SIA के प्रवक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि विमानों के बेड़े में सुधार, परिचालन दक्षता और ग्राहक अनुभव में सुधार के प्रयास जारी हैं, जो भविष्य में लाभप्रदता को बढ़ावा देंगे।
एयर इंडिया का यह वित्तीय झटका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में प्रतिस्पर्धा के बीच आता है। विमानन क्षेत्र में बदलाव और प्रतिस्पर्धी रणनीतियों के कारण, दोनों एयरलाइंस को चुनौतियों से पार पाकर बेहतर प्रदर्शन करना होगा।
वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, FY26 की इस रिपोर्ट ने एयरलाइन इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण सबक दिया है कि विलय और निवेश के निर्णयों को सही समय और रणनीति के साथ लागू करना आवश्यक है। सिंगापुर एयरलाइंस के लिए उपयुक्त प्रबंधन और सुधारात्मक कदम ही भविष्य में फायदे सुनिश्चित कर सकते हैं।

