BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच एक कड़वा विवाद देखने को मिला है। यह विवाद उस समय और अधिक तूल पकड़ गया जब UAE ने इजरायली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू द्वारा खाड़ी देश की यात्रा के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया। नेतन्याहू ने कथित तौर पर ईरान युद्ध के दौरान UAE का दौरा किया था, लेकिन UAE ने इस दावे को झूठा बताया।
इस बयान के तुरंत बाद ईरान के विदेश मंत्रालय के उप मंत्री अली बैहरामई अराकची ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि “जो भी इजरायल के साथ मिलकर क्षेत्र में विभाजन पैदा करने का प्रयास करेगा, उसे पूरी जवाबदेही का सामना करना पड़ेगा।” अराकची के इस बयान ने विवाद को और गहरा कर दिया है और क्षेत्रीय राजनीति में तनाव को बढ़ावा दिया है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह घटना BRICS की बैठक के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीति पर चर्चा के बीच सामने आई है, जिससे यह स्पष्ट है कि खाड़ी के देश राजनीतिक रूप से अभी भी एक-दूसरे के प्रति असहजता और शंका महसूस कर रहे हैं। UAE और ईरान के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे हैं, खासकर खाड़ी क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत को लेकर, जो अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बयानबाजी का विषय बन जाता है।
BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की यह बैठक जिस मकसद से बुलाई गई थी, उसमें वैश्विक आर्थिक सहयोग और सामरिक समझौतों पर ध्यान केंद्रित था। लेकिन क्षेत्र की राजनीतिक गतिरोध और रणनीतिक मतभेदों ने इस आयोजन को एक नए स्वरूप में बदल दिया। इस विवाद के चलते BRICS देशों की आपसी सहयोग की संभावनाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं।
साथ ही, इस टकराव से यह भी संकेत मिलता है कि खाड़ी क्षेत्र में इजरायल की भूमिका और उसकी भूमिका से जुड़े बयान आगे भी विवादों को जन्म दे सकते हैं। UAE की ओर से नेतन्याहू की यात्रा को खारिज करना एक तरह से क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने की रणनीति हो सकती है, जो निकट भविष्य में मध्य-पूर्व की कूटनीति को प्रभावित कर सकती है।
भले ही BRICS का फोकस आर्थिक सहयोग पर हो, लेकिन इस तरह की राजनीतिक असहमति यह दिखाती है कि भू-राजनीतिक मुद्दे और क्षेत्रीय विरोधाभास वैसा ही जटिल बने हुए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे विवाद अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं को और पेचीदा बनाते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।

