बेंगलुरु, 2024 – MIT बेंगलुरु के अंडरग्रेजुएट छात्रों को सेमीकंडक्टर उद्योग में व्यावहारिक ज्ञान और अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में छात्रों को सेमीकंडक्टर निर्माण प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा, जो आमतौर पर भारत में अंडरग्रेजुएट स्तर पर उपलब्ध नहीं होता।
मुंबई स्थित सेंटर फॉर माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी एंड इंडियन (CMTI) की अत्याधुनिक सुविधा का उपयोग कर, MIT बेंगलुरु ने छात्रों को उन्नत तकनीकी माहौल उपलब्ध कराया जहाँ वे वास्तविक समय में सेमीकंडक्टर बनाने की प्रक्रिया देख और समझ सकते हैं। यह पहल भारतीय शिक्षा प्रणाली में तकनीकी वैसे क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
MIT बेंगलुरु के अधिकारियों ने बताया कि इस साझेदारी से छात्रों को उद्योग की मांगों के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी। सेमीकंडक्टर फेब्रिकेशन की जटिल प्रक्रिया को समझना न केवल उनकी विशेषज्ञता बढ़ाएगा, बल्कि देश में सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास में भी योगदान देगा।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने वाफर प्रोसेसिंग, लिथोग्राफी, डोपिंग, थिन फिल्म डिपोजीशन जैसी तकनीकों की जानकारी प्राप्त की जो सामान्य संस्थानों में संभव नहीं है। टेक्नोलॉजी के इस क्षेत्र में घरेलू प्रतिभा को प्रोत्साहित करने में यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम से भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादक क्षमता बढ़ेगी और देश ग्लोबल चिप मेकिंग इंडस्ट्री में अपनी जगह मजबूत करेगा। MIT बेंगलुरु की इस पहल से छात्रों को करियर के नए अवसरों के साथ-साथ शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
सरकार और उद्योग जगत की मिली-जुली कोशिशों से इस तरह के प्रोग्राम्स को बढ़ावा देने की उम्मीद है ताकि भविष्य में भारत एक तकनीकी महाशक्ति के रूप में उभर सके। इस अनुभव से लैस युवा पीढ़ी देश की डिजिटल और तकनीकी क्षमताओं को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में सक्षम होगी।
अंततः, MIT बेंगलुरु के इस कदम को भारतीय शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जो सेमीकंडक्टर रणनीति को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक संसाधन और प्रतिभा विकसित करने की दिशा में है।

