स्वीडन, दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री उर्फ़ लॉफ़्टन क्रिस्टरसन के बीच हाल ही में स्वीडन में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और राजनैतिक मुलाकात हुई। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने बांग्ला साहित्य के महान कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर से प्रेरित अनूठे उपहारों का आदान-प्रदान किया।
स्वीडिश प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन ने पीएम मोदी को टैगोर के स्वीडन यात्राओं के दौरान 1921 एवं 1926 में स्वयं उनके द्वारा लिखे गए हस्तलिखित सूक्तियों की प्रतियां भेंट कीं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उप्साला विश्वविद्यालय से ली गई एक दुर्लभ तस्वीर भी प्रधानमंत्री मोदी को सौंपी। यह तस्वीर टैगोर के स्वीडन प्रवास के दौरान की है और इसे कला व इतिहास की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सांस्कृतिक सौगात को न केवल सम्मानजनक बताया बल्कि इसे दोनों देशों के आपसी संबंधों की गहराई का प्रतीक करार दिया। उनकी प्रतिक्रिया में कहा गया कि टैगोर के अद्भुत साहित्यिक कार्यों और उनके विश्वबंधुत्व की भावना दोनों राष्ट्रों को जोड़ने में मदद करती है।
रवीन्द्रनाथ टैगोर की स्वीडन यात्रा उनके साहित्यिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए ऐतिहासिक रही। उप्साला विश्वविद्यालय में उनके भाषण और कार्य आज भी वहां के शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में याद किए जाते हैं। इस बार पीएम मोदी के साथ हुए उपहारों के आदान-प्रदान ने इस विरासत को फिर से जीवंत कर दिया है।
इस अवसर पर दोनों नेताओं ने भारत-स्वीडन के बीच आर्थिक, तकनीकी और पर्यावरणीय सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक समझ और सहयोग ही देशों के बीच दीर्घकालिक मैत्री और विकास का आधार होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के सांस्कृतिक आदान-प्रदान दोनों देशों के आम लोगों के बीच भी आपसी सम्मान और जुड़ाव को बढ़ावा देते हैं, जो द्विपक्षीय सम्बन्धों को स्थिर और समृद्ध बनाने में कारगर साबित होता है।

