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As countries urbanise, 38% of world's population will live in large cities by 2100: Study
जैसे-जैसे देश शहरीकरण की ओर बढ़ेंगे, 2100 तक दुनिया की 38% आबादी बड़े शहरों में रहेगी: अध्ययन
'Disbelief' in India camp after a failure to adapt to 'fantastic' Ireland
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It’s a bad idea to scratch bug bites, research says
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वाशिंगटन: अमेरिका और चीन के बीच हाल ही में एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जिसमें चीन ने अमेरिकी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कुछ अहम प्रतिबद्धताएँ स्वीकार की हैं। इस समझौते में चीन rare earth सप्लाई चेन की समस्याओं को دور करने, 200 बोइंग विमान खरीदने और 2026 से 2028 के बीच हर साल कम से कम 17 अरब अमेरिकी डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पादों का आयात करने के वादे शामिल हैं।

यह समझौता वैश्विक व्यापार और आर्थिक सहयोग के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि पिछले वर्षों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापार को लेकर तनाव थे। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि rare earth यानी दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की आपूर्ति सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक है, क्योंकि ये तत्व उच्च तकनीक उत्पादों जैसे मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों में उपयोग होते हैं।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि चीन की इस प्रतिबद्धता से अमेरिकी उद्योगों को भरोसा मिलेगा और आर्थिक सहयोग में वृद्धि होगी। वहीं, बोइंग के लिए यह सौदा खास महत्व रखता है क्योंकि इससे कंपनी के विमान निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी।

चीन की तरफ से यह समझौता अमेरिका के कृषि क्षेत्र के लिए भी फायदेमंद होगा। अमेरिकी कृषि उत्पादों जैसे सोयाबीन, गेहूं, मांस और डेयरी उत्पादों का निर्यात इस समझौते के तहत बढ़ेगा, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा। यह चीन की खाद्य सुरक्षा को भी सशक्त बनाएगा क्योंकि इन उत्पादों की मांग वहां लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ये प्रतिबद्धताएँ दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में स्थिरता लाएंगी और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करेंगी। हालांकि, इस समझौते को पूरी तरह लागू करने के लिए दोनों पक्षों को अगले कुछ वर्षों में निरंतर सहयोग और संवाद बनाए रखना होगा।

इस बीच, अमेरिका की चीन नीति पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें तकनीकी प्रतिस्पर्धा, व्यापार घाटे और सुरक्षा चिंताएं शामिल हैं। यह समझौता इन चुनौतियों के बीच परस्पर सहमति का एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, यह नया समझौता वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जिससे दोनों महाशक्तियाँ बेहतर सहयोग के रास्ते खोज सकेंगी।

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