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ईएसआईसी ने नए अस्पताल सीधे चलाने का फैसला क्यों किया: पश्चिम बंगाल की ट्रिगर
As countries urbanise, 38% of world's population will live in large cities by 2100: Study
जैसे-जैसे देश शहरीकरण की ओर बढ़ेंगे, 2100 तक दुनिया की 38% आबादी बड़े शहरों में रहेगी: अध्ययन
'Disbelief' in India camp after a failure to adapt to 'fantastic' Ireland
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सिर्फ 10.2% महिलाएं ही मैदान में उतरीं, 2023 में महिला विधेयक पारित होने के बाद 20 विधानसभा चुनावों में: रिपोर्ट
Through The Magnificent Life, artist Rajesh RV imagines a world of harmony and hope
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Ancient Aaykkudi Temple Discovered in Vizhinjam | Kerala Temple History
विजीनजं में प्राचीन अय्यकुडी मंदिर की खोज | केरल मंदिर इतिहास
It’s a bad idea to scratch bug bites, research says
कीट के काटने पर खुजलाना एक गलत कदम है, शोध में बताया गया
What decides your height?
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Apex chemist body digs in on 24-hour strike, Govt pharmacies remain open

नई दिल्ली: लगभग एक सप्ताह पहले, भारतीय औषधि व्यवसाय संघ (AIOCD) ने शिकार मूल्य निर्धारण (Predatory Pricing) के खिलाफ विरोध स्वरूप 24 घंटे की हड़ताल का आह्वान किया था। इस हड़ताल का उद्देश्य सरकार की ओर से लागू किए गए ऐसे मूल्य निर्धारण नीतियों के खिलाफ अपनी असहमति जताना था, जिन्हें संघ ने व्यावसायिक हितों के लिए नुकसानदायक माना।

हड़ताल के दौरान देश भर के कई निजी फार्मेसियां बंद रहीं, जबकि सरकारी एवं पब्लिक सेक्टर की फार्मेसियां पूरे दिन संचालित होती रहीं। एपेक्स केमिस्ट बॉडी ने इस हड़ताल को lekar नेशनल स्तर पर समर्थन दिया है, लेकिन सरकारी सेवाओं के जारी रहने पर जोर देते हुए उन्हें चिकित्सा आपूर्ति की निरंतरता भी सुनिश्चित करनी थी।

संघ का दावा है कि शिकार मूल्य निर्धारण नीतियां बड़ी फार्मा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए लागू की जा रही हैं, जिससे छोटे दवा विक्रेता आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मूल्य निर्धारण से बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा होती है और दवा विक्रेता धीरे-धीरे बंद होने को मजबूर हो रहे हैं।

सरकार ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि वे दवाओं की किफायती और उचित उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सरकारी फार्मेसियों के खुला रहनेर का मुख्य कारण चिकित्सा सेवाओं को बाधित न होने देना था ताकि आम जनता को किसी प्रकार की दिक्कत न हो।

दवा व्यापारियों और सरकार के बीच इस गतिरोध को लेकर व्यापक चर्चा जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्षों को मध्यस्थता के जरिए शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचना चाहिए, ताकि मरीजों को असर न पड़ने पाए और स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर भी बना रहे।

विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि फार्मा बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और उचित मूल्य निर्धारण के लिए नई नीतियों का निर्माण किया जाना चाहिए, जिससे सभी हितधारकों के लिए संतुलन बना रहे। इस हड़ताल से स्पष्ट हो गया है कि दवा क्षेत्र में व्यापारिक हित और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण है।

वर्तमान हालात में दवा विक्रेताओं की मांगें और सरकार की प्रतिबद्धताएं दोनों महत्वपूर्ण हैं, और इस मुद्दे पर जल्द ही समाधान निकालना आवश्यक माना जा रहा है।

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