मुम्बई, 1 मई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य भर में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक नया नियम लागू किया है। इसके तहत अब रेस्तरां और ईटिंग आउटलेट्स में मेनू और बिल पर ‘चीज़ एनालॉग’ अर्थात पनीर के विकल्प का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नियम 1 मई से प्रभावी हो चुका है।
यह कदम ऐसे खाद्य पदार्थों के दुरुपयोग और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले प्रयासों को रोकने की दिशा में उठाया गया है, जहां पनीर की बजाय सस्ते और कम गुणवत्ता वाले ‘चीज़ एनालॉग’ उत्पादों का इस्तेमाल होता है। महाराष्ट्र खाद्य सुरक्षा विभाग की एक व्यापक जांच अभियान के तहत इस नियम को लागू किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके और वे सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन का आनंद ले सकें।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी कहते हैं, “हमारे निरीक्षण के दौरान हमें कई जगह ऐसे उदाहरण मिले जहां उपभोक्ताओं को पनीर के बदले चीज़ एनालॉग परोस दिया जाता था, लेकिन मेनू या बिल पर इसका उल्लेख नहीं किया जाता था। यह उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी के समान है। इस कारण से हमने इस नियम को लागू किया है जिससे पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।”
व्यापारिक प्रतिष्ठानों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने मेनू में पनीर के विकल्प के रूप में इस्तेमाल हो रहे चीज़ एनालॉग उत्पाद का नाम और प्रकृति स्पष्ट रूप से लिखें। इसके अलावा, बिल पर भी इसका उल्लेख आवश्यक होगा। ऐसा न करने पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
उपभोक्ता संगठनों ने इस नियम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल उपभोक्ता जागरूक होंगे बल्कि खाद्य उद्योग में गुणवत्ता सुधार और पारदर्शिता भी आएगी। वहीं, कुछ छोटे दुकानदारों ने नियम के अनुपालन में आ रहे खर्च और अतिरिक्त कागजी कार्रवाई को चुनौती के रूप में बताया है।
महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि इस तरह के कदम से उपभोक्ता हितों की सुरक्षा होगी और उन्हें धोखाधड़ी से बचाया जा सकेगा। यह नियम राज्य में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसका परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी खाद्य सेवा मिलेगी।

