कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लेते हुए धर्म आधारित पिछड़ी जाति (ओबीसी) श्रेणियों को खत्म कर दिया है। इस कदम के तहत सरकार ने उन 66 समाजों को ओबीसी सूची में पुनः शामिल किया है जिनका पिछड़ा वर्ग का दर्जा कोलकाता उच्च न्यायालय के एक निर्णय के कारण 2010 से 2012 के बीच रोका गया था।
यह फैसला कोलकाता उच्च न्यायालय की उस हालिया रिट की प्रतिक्रिया में लिया गया है जिसमें कई समुदायों को 2010 से 2012 के बीच मिले ओबीसी श्रेणी के दर्जे को निरस्त कर दिया गया था। न्यायालय ने इस निर्णय में कहा कि धर्म के आधार पर पिछड़ी जाति का वर्गीकरण संविधान के अनुच्छेद 15 की धारा 1 के तहत अनुचित और असंवैधानिक है।
सरकार ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि राज्य में सामाजिक न्याय और समावेशिता बनाए रखने के उद्देश्य से इस निर्णय को लागू किया गया है। यह भी बताया गया है कि अब सभी पिछड़ी जाति की लाभार्थी नीतियों का पालन सभी समुदायों के लिए समान रूप से किया जाएगा।
विशेषज्ञों की माने तो यह फैसला सामाजिक समरसता को बढ़ावा देगा और जातिगत आधार पर विभाजन को कम करेगा। हालांकि, कुछ राजनीतिक दलों और समुदायों ने इस निर्णय पर आपत्ति भी जताई है, उनका मानना है कि इससे कुछ समूहों को होने वाले विशेष लाभों में कटौती होगी।
राज्य के सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी ने कहा कि सरकार सभी संबंधित पक्षों से बातचीत जारी रखेगी और उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए प्रयासरत रहेगी। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछड़ी जाति समुदायों के लिए आरक्षित सरकारी नौकरियां और अन्य लाभ संविधान और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही जारी रहेंगे।
पश्चिम बंगाल में पिछड़ा वर्ग को लेकर यह सुधारात्मक कदम सामाजिक न्याय के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय संवैधानिक नियमों और न्यायालय के आदेशों के अनुरूप है और इससे सभी वर्गों के बीच समानता स्थापित होगी।
इससे पहले 2010 से 2012 के बीच कई समुदायों को ओबीसी वर्ग में शामिल किया गया था जिससे उन्हें आरक्षण और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता था, लेकिन उच्च न्यायालय के फैसले ने इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया। अब राज्य सरकार ने पूरे पहलू पर पुनर्विचार करते हुए संतुलित और निष्पक्ष नीति अपनाई है।
इस फैसले के साथ ही पश्चिम बंगाल में सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है, जिससे यह मानना सही होगा कि सरकार संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को प्राथमिकता दे रही है। इससे राज्य में पिछड़े वर्ग के विकास के साथ-साथ अन्य समुदायों के साथ बेहतर तालमेल और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
