नई दिल्ली: जीवनशैली ब्रांड निकॉबर ने अपने 10 साल पूरे कर लिए हैं। इस महत्वपूर्ण अवसर पर संस्थापक सिमरन लाल और राउल राय ने ब्रांड की विकास यात्रा, उसकी उपलब्धियों और आने वाले समय में नई योजनाओं पर चर्चा की। निकॉबर न केवल एक फैशन ब्रांड के रूप में जाना जाता है, बल्कि यह भारतीय शिल्प और आधुनिक आकृतियों को मिलाकर एक अनूठा मेल प्रस्तुत करता है।
सिमरन लाल ने बताया, “हमने शुरूआत में छोटे स्तर पर काम किया था, लेकिन हमेशा से हमारा मकसद भारतीय शिल्प को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर लाना था। पिछले एक दशक में, ब्रांड ने ₹200 करोड़ से अधिक का कारोबार किया है, जो हमारे लिए गर्व की बात है।” वहीं, राउल राय ने कहा कि इस सफर में चुनौतियाँ भी आईं, लेकिन उनकी टीम ने उन्हें पार करते हुए अपने उत्पादों की गुणवत्ता और डिज़ाइन पर हमेशा ध्यान दिया।
निकॉबर की सफलता में कारीगरों के योगदान को भी न भूलना चाहिए। स्थानीय शिल्पकारों के सहयोग से हर उत्पाद में देशी संस्कृति की झलक मिलती है। निकॉबर ने भारत के विभिन्न हिस्सों के हस्तशिल्प को संरक्षण देने और उसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ब्रांड के अगले चरण की बात करें तो, हाल ही में निकॉबर ने प्रतिष्ठित डिजाइनर राजेश प्रताप सिंह के साथ साझेदारी की घोषणा की है। इस सहयोग से दोनों पक्षों को उम्मीद है कि वे भारतीय फैशन उद्योग में नई ऊंचाइयों को छू पाएंगे। राजेश प्रताप सिंह के अनूठे डिजाइनों और निकॉबर की परंपरागत कारीगरी के मेल से भारतीय फैशन प्रेमियों को कुछ खास देखने को मिलेगा।
सिमरन लाल ने साझा किया, “राजेश के साथ हमारा कॉम्बिनेशन एक नए अध्याय की शुरुआत है। हम चाहते हैं कि भारतीय परिधान न केवल देश में बल्कि विश्व स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाएं।” इस साझेदारी का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों को और प्रोत्साहित करना और उनके काम को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है।
अंततः, निकॉबर की यह दस साल की यात्रा भारतीय फैशन उद्योग में एक मिसाल बन चुकी है। यह न केवल एक व्यवसाय की कहानी है, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास भी है। निकॉबर इस दशक में अपनी पहचान को और मजबूती देने की दिशा में लगातार काम कर रहा है, जिससे भारतीय ब्रांडों की वैश्विक प्रतिष्ठा और बढ़ेगी।
