पंजाब में पंखे भी अपनी जिम्मेदारी से छोटा पड़ने लगे हैं। बढ़ती गर्मी ने राज्यवासियों की जिंदगी कठिन बना दी है। तेज लू और बढ़ते तापमान के कारण अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के मामलों में जबरदस्त वृद्धि हुई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पंजाब के कई अस्पतालों ने विशेष हीट स्ट्रोक प्रबंधन इकाइयों को संचालित करना शुरू कर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार की गर्मी सामान्य से कहीं अधिक प्रबल और लगातार बनी हुई है। अधिक तापमान के कारण लोग न केवल शारीरिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि रात भर अनिद्रा और बेचैनी से जूझ रहे हैं। सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक हीटवेव की मार से पिछले सप्ताह में पंजाब के अस्पतालों में दर्ज हुए मरीजों की संख्या में 40% से अधिक की वृद्धि हुई है।
इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर सभी जिलों में हीट स्ट्रोक प्रबंधन यूनिट की स्थापना अनिवार्य कर दी है। ये यूनिट विशेष उपकरणों, दवाओं और प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मचारियों से लैस हैं ताकि ज्वर, पसीना न आना, बेहोशी जैसे लक्षण दिखाने वाले रोगियों को शीघ्रतम उपचार मिल सके।
अस्पतालों ने गर्मी से बचाव के लिए जन जागरूकता अभियान भी शुरू किए हैं जिसमें प्यास लगने से पहले पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और दोपहर के समय बाहरी गतिविधियों से बचाव करने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों ने कहा कि हीट स्ट्रोक गंभीर तरह का है और इसकी शुरुआती स्थिति में चिकित्सकीय मदद न मिलने पर यह जानलेवा भी हो सकता है।
जलवायु विशेषज्ञों ने चेताया है कि प्रतिवर्ष गर्मी की लहरें और अधिक तीव्र होती जा रही हैं, जिसका प्रभाव जन स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ रहा है। इस चुनौती का सामना करने के लिए स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। पंजाब सरकार ने भी आपदा प्रबंधन विभाग के साथ मिलकर ऐसे कदम उठाए हैं जिससे तापमान बढ़ने पर त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके।
यह गर्मी के इस मुसलसल प्रकोप के बीच, आम नागरिकों से भी सावधानी बरतने की अपील की गई है कि वे स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए जरूरी हिदायतों का पालन करें। आबोहवा विभाग यह अनुमान लगा रहा है कि आने वाले सप्ताह में राहत की कोई संभावना नहीं है, लिहाजा सतर्कता ही इस संकट से निपटने का एकमात्र उपाय है।

