नई दिल्ली। क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की आगामी बैठक से पहले, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा है कि इस समूह की भूमिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अब भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उन चिंताओं को नकार दिया जो पिछले कुछ समय में क्वाड की अहमियत को लेकर उठी थीं।
मोतेगी ने शुक्रवार को कहा कि क्वाड का एजेंडा न केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित है बल्कि इसमें आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास, विशेषकर महत्वपूर्ण खनिजों के सहयोग पर भी फोकस है। उन्होंने भारत और अन्य सदस्य देशों से इस क्षेत्र में अधिक सहयोग की उम्मीद जताई।
जापानी विदेश मंत्री ने कहा, “हमारे बीच की बातचीत में प्रमुख विषयों में से एक महत्वपूर्ण खनिजों का सहयोग है जो कि भविष्य की टेक्नोलॉजी के लिए अनिवार्य है। हमें बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा, खासकर भारत में।”
उन्होंने यह भी कहा कि क्वाड के माध्यम से सदस्य देश एक दूसरे के अनुभवों से सीख सकते हैं और क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। मोतेगी ने इस समूह को एक ऐसा मंच बताया जो आर्थिक समझौतों और तकनीकी सहयोग के लिए भी जरूरी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, क्वाड में भारत, जापान, अमेरिका, और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं, और यह समूह मुख्य रूप से चीन की बढ़ती दबदबा को संतुलित करने की रणनीति के रूप में देखा जाता है। वर्तमान में, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक नीतियों के लिहाज से क्वाड का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
भारत ने भी इस समूह की भूमिका को स्वीकार करते हुए कहा है कि यह व्यापक क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है और सदस्य देशों के बीच भरोसे को मजबूत करता है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी क्वाड की बैठकों को सकारात्मक रूप में देखा है और भविष्य में इससे बेहतर परिणामों की उम्मीद जताई है।
मोतेगी ने अंत में कहा कि क्वाड को केवल एक सुरक्षा मंच के बजाय एक बहुमुखी मंच के रूप में देखा जाना चाहिए, जो क्षेत्र की आर्थिक समृद्धि, तकनीकी विकास तथा सामाजिक स्थिरता के लिए काम करता है। यह बैठक इन सभी पक्षों को लेकर विस्तृत चर्चा करेगी।
इस प्रकार, आगामी क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में न केवल सुरक्षा मामलों पर ध्यान दिया जाएगा बल्कि आर्थिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी और बौद्धिक अधिकारों की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे भी प्रमुखता से चर्चित होंगे। इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता और विकास को नया वेग मिलने की संभावना है।

