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गुवाहाटी, 27 अप्रैल: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने सोमवार को कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) बिल का सदन में प्रस्तुत होना उनकी सरकार की महिलाओं के अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता का परिचायक है, खासकर अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के लिए।

मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “यूसीसी बिल को लेकर हमारी पहल महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह बिल अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के हितों की रक्षा करेगा और उन्हें समान अवसर प्रदान करेगा।”

उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार सामाजिक समरसता और लैंगिक समानता को अपनी प्राथमिकता मानती है। उन्होंने कहा, “हमारी कोशिश है कि हर वर्ग के लोगों को न्याय, समानता और सुरक्षा मिले। यूसीसी बिल इसी प्रयास का हिस्सा है।”

पूर्व में काफी समय से चर्चित यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य विभिन्न धार्मिक समूहों के तहत आने वाले व्यक्तिगत कानूनों को एक समान, सार्वभौमिक कानून में बदलना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह प्रयास महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव खत्म करने और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने का एक माध्यम होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, यूसीसी बिल महिलाओं को उनकी सामाजिक और कानूनी सुरक्षा देता है, साथ ही उनके अधिकारों की रक्षा करता है। इससे अलग-अलग धार्मिक कानूनों के तहत होने वाली भेदभावपूर्ण प्रथाओं में कमी आएगी।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने यह भी जोर देकर कहा कि सरकार सामाजिक न्याय को प्राथमिकता देती है और इस बिल के माध्यम से अल्पसंख्यक महिलाओं के हक की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने सभी पार्टी और समुदायों से इस महत्वपूर्ण विषय पर सकारात्मक समर्थन की अपील की है।

राज्य के कई सामाजिक कार्यकर्ता और महिला संगठन भी इस बिल की प्रशंसा कर रहे हैं और इसे महिलाओं के अधिकारों के लिए एक बड़ा कदम मान रहे हैं। उनका मानना है कि यह बिल न केवल महिलाओं को सुरक्षित करेगा बल्कि सामाजिक एकता को बढ़ावा देगा।

असम सरकार की यह पहल उस व्यापक बदलाव का हिस्सा है जो संविधान के अनुच्छेद 15 और 21 के तहत सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करने की दिशा में हो रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के समान अवसर और न्याय मिले।

इस तरह, यूसीसी बिल का सदन में प्रस्तुत होना न केवल एक कानून प्रवर्तन का मामला है, बल्कि देश के सामाजिक ताने-बाने में एक नई सोच और बदलाव की शुरुआत भी है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने उम्मीद जताई है कि यह बिल जल्द ही पारित होकर महिलाओं के लिए अनुचित प्रथाओं को खत्म करने में सहायक सिद्ध होगा।

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