देश भर में रक्त स्टेम सेल दान के प्रति जागरूकता में सुधार हुआ है, विशेषकर महानगरों में जहां लोगों की भागीदारी बढ़ी है। हालांकि, टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों से दाता पंजीकरण अभी भी अपेक्षाकृत कम है, जिससे रक्त कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आवश्यक दाता कमी बनी रहती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मुख्य शहरों में जागरूकता अभियानों से लाभ हुए हैं, लेकिन ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में इस विषय पर अभी भी पर्याप्त जानकारी और प्रोत्साहन की कमी है। रक्त कैंसर के मरीजों के लिए स्टेम सेल दान दुनिया में एकमात्र जीवनदायिनी उम्मीद साबित होती है, इसलिए हर क्षेत्र से दाता जुटाना बेहद जरूरी है।
डोनर रजिस्ट्री में अधिक समावेशन से ना केवल मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा, बल्कि दाताओं की विविधता भी बढ़ेगी। देश में रक्त कैंसर के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ दाता आधार मजबूत करना आवश्यक हो गया है। मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और गैर-सरकारी संस्थाओं को मिलकर विशेष जागरूकता अभियान चलाने चाहिए, ताकि भारत के दूरदराज और कम विकसित क्षेत्रों के लोग भी रक्त स्टेम सेल दान के महत्व को समझ सकें।
यह जागरूकता केवल स्वास्थ्य विशेषज्ञों तक सीमित न रहकर, स्कूल, कॉलेज, स्थानीय पंचायत और स्वास्थ्य केंद्रों तक फैलानी होगी ताकि युवाओं में यह संदेश प्रभावी रूप से पहुंचे। दाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाना और उन्हें जानकारी उपलब्ध कराना भी अहम पहलू हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय में, समाज के हर वर्ग को इस नेक काम में भागीदारी करनी चाहिए, जिससे रक्त कैंसर जैसे जानलेवा रोगों के मरीजों को अवसर मिल सके। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के साथ-साथ सामुदायिक मीटिंग और व्यक्तिगत संवाद का सहारा लिया जाना चाहिए। राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर स्टेम सेल दाता रजिस्ट्री को मजबूत करना ही रक्त कैंसर के खिलाफ लड़ाई में सफलता की कुंजी है।

