जो़धपुर, 27 अप्रैल: असाराम बापू, जो कि बलात्कार के दोषी हैं, ने आज जोधपुर के जिला जेल में आत्मसमर्पण कर दिया है। यह कदम तब आया है जब राजस्थान हाईकोर्ट ने उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है, हालांकि अदालत ने कुछ अन्य संगीन धाराओं के तहत उनके खिलाफ लगे आरोपों से उन्हें बरी भी किया है।
अदालत ने विशेष रूप से यह साफ किया कि असाराम पर आईपीसी और पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिग लड़की के साथ हुए गैंग रेप और गैंग पेनेट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट के आरोप सिद्ध नहीं हुए। इसलिए इन आरोपों से उन्हें न्यायिक स्तर पर मुक्त किया गया है, जबकि मुख्य बलात्कार का दोषी करार उन्हें बरकरार रखा गया है।
असाराम बापू की यह सजा धर्म के नाम पर अपराधों पर न्यायिक कार्रवाई के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है। उनकी उम्रकैद की सजा को उच्च न्यायालय ने स्थायी किया है, जिससे यह साफ हो गया है कि कानून के सामने अपराधी चाहे किसी भी पद पर हो, उसे दंड से बचाया नहीं जा सकता।
असाराम के आत्मसमर्पण के बाद जेल प्रशासन ने उनकी सुरक्षा एवं व्यवस्था को लेकर विशेष व्यवस्था की है। जेल अधिकारियों ने बताया कि असाराम को अन्य कैदियों से अलग रखा जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
वहीं, पीड़ित परिवार और महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले सामाजिक संगठनों ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है और इस फैसले को न्याय के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा है। हालांकि, उन्होंने सभी आरोपों से बरी किए जाने को लेकर mixed प्रतिक्रियाओं को भी व्यक्त किया है।
इससे पहले असाराम पर विभिन्न आरोप लगने के बाद माहौल काफी गर्माया था और उनके खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। न्यायालय में लंबी सुनवाइयों और जांच के बाद यह फैसला सुनाया गया है जो कि कानून और न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता को दर्शाता है।
साथ ही, अदालत ने पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा भी की है ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में बेहतर जांच सुनिश्चित की जा सके।
असाराम के इस आत्मसमर्पण के बाद अब उनका कैद जीवन शुरू होगा और वह अपनी सजा पूरी करेंगे। यह मामला समाज में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी एक निर्णायक मोड़ साबित होगा।

