हैदराबाद. भारत में सी-सेक्शन के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि तेलंगाना राज्य इस मामले में शीर्ष पर है। हाल की रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना में लगभग 60% बच्चों का जन्म सिजेरियन सेक्शन के माध्यम से हो रहा है, जो कि देश में सबसे अधिक है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, देशभर में औसतन 40% बच्चे सी-सेक्शन से जन्म लेते हैं, जबकि तेलंगाना की यह दर लगभग 6 में से 4 बच्चों से भी अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ती दर के पीछे कई सामाजिक और चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, कई बार प्रसूति के दौरान शारीरिक जटिलताओं के कारण सिजेरियन सेक्शन करना अनिवार्य हो जाता है, लेकिन कभी-कभी चिकित्सा संबंधी गैर-जरूरी हस्तक्षेप भी इस वृद्धि के पीछे कारण हो सकते हैं। इसके अलावा, निजी अस्पतालों में सी-सेक्शन की संख्या अधिक होने का कारण भी चर्चा में है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि जहां सी-सेक्शन महत्वपूर्ण और जीवनरक्षक प्रक्रिया है, वहीं इसके बढ़ते प्रचलन को सावधानी से देखा जाना चाहिए। लंबे समय तक सी-सेक्शन की अधिकता माताओं और बच्चों दोनों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है।
सरकार ने भी इस मसले पर ध्यान देना शुरू कर दिया है और स्वस्थ मातृत्व को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं। उनमें प्रसव सम्बन्धी जागरूकता अभियानों के साथ-साथ अस्पतालों में सही प्रथाओं का पालन सुनिश्चित करना शामिल है।
विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में यदि गैर-जरूरी सी-सेक्शनों पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो इससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर दीर्घकालीन नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि प्रसव के दौरान चिकित्सकों द्वारा उचित मूल्यांकन और निर्णय लिया जाए।
इस रिपोर्ट के प्रकाश में यह स्पष्ट होता है कि तेलंगाना को मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और जागरूकता लाने की आवश्यकता है ताकि हर बच्चे और मां दोनों स्वस्थ रहें और स्वस्थ जीवन जी सकें।

