देश में तंबाकू चबाने वाली महिलाओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है। हाल के वर्षों में महिलाओं में तंबाकू की लत से पीड़ित रोगियों के मामलों में न केवल वृद्धि हुई है, बल्कि इससे जुड़ी बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, तंबाकू का सेवन महिलाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है, जिसमें कैंसर, फेफड़ों की बीमारियां, और दिल की समस्याएं प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू के चबाने से महिलाओं में मुंह, गले और पेट के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
इस संदर्भ में, डॉ. रश्मि सिंह, एक प्रमुख ऑनकोलॉजिस्ट, बताती हैं कि तंबाकू में मौजूद नाइट्रोसामाइन जैसे हानिकारक तत्व शरीर में प्रवेश करके कोशिकाओं को प्रभावित करते हैं, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं में इस लत की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाना बेहद आवश्यक है।
सरकारी स्तर पर, तंबाकू नियंत्रण अधिनियम के तहत कई गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन महिला आबादी में तंबाकू से जुड़ी जागरूकता अभी भी कम है। स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न शैक्षिक और जागरूकता अभियान शुरू किए हैं, जिनका उद्देश्य तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों में चेतना लाना है।
इसके अलावा, कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह सुझाव दे रहे हैं कि संबंधित परिवारों और समुदायों को महिलाओं को तंबाकू से बचाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। बालिकाओं और युवतियों के लिए तंबाकू के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करना और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना भी इस समस्या को कम करने में मददगार सिद्ध हो सकता है।
तंबाकू के सेवन से जुड़ी इस बढ़ती समस्या को देखते हुए, यह आवश्यक है कि समाज, सरकार और स्वास्थ्य संस्थान मिलकर कार्य करें ताकि महिलाओं की सेहत सुरक्षित रहे और वे तंबाकू की इस घातक लत से मुक्ति पा सकें।

