नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर हाल ही में जहां शिक्षकों और अभिभावकों की ओर से चिंता जताई जा रही है, वहीं यह प्रणाली अपनी आलोचनाओं के घेरे में है। इस रिपोर्ट में हम जानेंगे कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम क्या है, इसकी पृष्ठभूमि क्या रही, इसे कब और क्यों लागू किया गया, और इसके कार्यान्वयन के बाद क्या परिणाम सामने आए।
ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) एक डिजिटल मूल्यांकन तकनीक है, जिसमें बोर्ड द्वारा सेट किए गए मूल्यांकनकर्ता कॉम्प्यूटर पर छात्रों के उत्तरपत्रों को स्कैन कर ऑनलाइन ही जाँचते हैं। इसका उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी, त्वरित और त्रुटि-रहित बनाना था।
यह तकनीक भारत में 2016-17 से धीरे-धीरे लागू हो रही है और दुनिया के कई विकसित देशों जैसे दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और संयुक्त राज्य अमेरिका में पहले से ही सफलतापूर्वक कार्यरत है। इन देशों में OSM ने मूल्यांकन की गुणवत्ता बढ़ाने और अनुचित अंक-प्रदानी में कमी लाने में मदद की है।
CBSE ने भी इसे इसी उद्देश्य से अपनाया था ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया में समय की बचत हो और परिणामों की विश्वसनीयता बढ़े। बोर्ड ने शुरुआत में 10वीं और 12वीं कक्षा के कुछ विषयों में इसे परीक्षण के तौर पर लागू किया। लेकिन, भारत के भौगोलिक और तकनीकी विविधता के कारण कई जगहों पर इसे लागू करने में तकनीकी कठिनाइयां आईं।
हालांकि, इस प्रणाली को लेकर कई शिक्षकों ने शिकायत की कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग से उत्तर पुस्तिकाओं की व्याख्या में तकनीकी सीमाओं के कारण गुणवत्ता में कमी आ रही है। साथ ही, कुछ छात्रों और अभिभावकों ने इस प्रणाली पर पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए। विशेषकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के शिक्षकों को डिजिटल उपकरणों का अभाव भी एक बड़ी चुनौती बना।
इन आलोचनाओं के बीच, CBSE ने जांच कमिटी गठित की और इस मुद्दे पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। बोर्ड ने कहा कि वे निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध हैं और तकनीकी समस्याओं को दूर करने तथा मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक सुसंगत बनाने हेतु कदम उठा रहे हैं। बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया की समीक्षा भी शुरू कर दी है और जल्द ही आवश्यक संशोधन लागू करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऑन-स्क्रीन मार्किंग को सही तरीके से और समुचित तकनीकी साधनों के साथ लागू किया जाए तो यह शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। फिलहाल, इस पर उठ रही चुनौतियों को समझ कर ही इस व्यवस्था को बेहतर किया जा सकता है।
इस प्रकार, CBSE का ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम एक आधुनिक प्रयास है, जो अभी पूर्ण रूप से स्थिर नहीं हो पाया है, लेकिन सुधार के साथ भविष्य में यह अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है।
