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विश्व तंबाकू निषेध दिवस से पहले प्रकाशित एक नए अध्ययन ने हर्बल सिगरेट को लेकर महत्वपूर्ण सावधानियां दी हैं। IIT गांधीनगर (IITGN) और इलिनोइस विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि हर्बल सिगरेट से निकलने वाले उत्सर्जन पारंपरिक तंबाकू उत्पादों के समान या उससे भी अधिक हानिकारक हो सकते हैं। यह निष्कर्ष उन दावों को चुनौती देता है जो हर्बल सिगरेट को स्वस्थ विकल्प बताकर बाजार में पेश किए जाते हैं।

अध्ययन के अनुसार, हर्बल सिगरेट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के जलने पर न केवल समान स्तर के हानिकारक रसायन निकलते हैं, बल्कि कई बार ये उत्सर्जन तंबाकू सिगरेट से भी ज्यादा विषैले प्रमाणित होते हैं। इससे लोगों को यह भ्रम हो सकता है कि हर्बल सिगरेट स्वास्थ्य के लिए कम नुकसानदायक है, जबकि वास्तव में यह गलतफहमी जोखिम को बढ़ा सकती है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि वर्तमान में हर्बल सिगरेट के लिए कोई स्पष्ट नियामक ढांचा मौजूद नहीं है, जिससे इनके स्वास्थ्य दावों पर संदेह उठता है। बाजार में उपलब्ध हर्बल उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का कोई सुनिश्चित प्रमाणीकरण नहीं है, जिसके कारण उपभोक्ता ठोस सूचना के बिना निर्णय लेते हैं।

इस अध्ययन में हर्बल सिगरेट से निकलने वाले हानिकारक पदार्थों की तुलना तंबाकू सिगरेट के उत्सर्जन से की गई है, जिनमें निकोटिन न होने के बावजूद कई विषैले रसायन पाए गए। शोध का यह भी निष्कर्ष है कि हर्बल सिगरेट के नियमित सेवन से भी फेफड़ों और अन्य शरीर के अंगों को नुकसान हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस रिपोर्ट को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है और उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे हर्बल सिगरेट को स्वास्थ्यप्रद विकल्प न समझें। उन्होंने सरकार से भी अनुरोध किया कि हर्बल सिगरेट पर कड़े नियामक नियम बनाए जाएं और इनके विज्ञापनों में गलत दावे लगाने पर पूरी कार्रवाई हो।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस के आसपास यह शोध परिणाम तंबाकू नियंत्रण नीतियों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक चेतावनी के रूप में देखे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता फैलाकर और बेहतर नियामक प्रावधानों के जरिए ही इन गलतफहमियों को दूर किया जा सकता है और लोगों को सुरक्षित विकल्प चुनने में मदद मिल सकती है।

अंततः, यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि हर्बल सिगरेट को तंबाकू के स्वस्थ विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जबकि ये उत्पाद निकोटिन मुक्त हो सकते हैं, फिर भी इनके उपयोग से उत्पन्न हानिकारक उत्सर्जन से स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न होते हैं, जिनसे सावधान रहना आवश्यक है।

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