राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में अधिक वजन और मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इस सर्वेक्षण से पता चलता है कि इन राज्यों में औसतन वयस्कों में मोटापे और अधिक वजन की दर काफी उच्च हो गई है, जो भविष्य में मधुमेह जैसी बीमारियों के बढ़ने का संकेत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिणी राज्यों में बदलते जीवनशैली, खान-पान की आदतों में बदलाव और शारीरिक गतिविधियों में कमी मुख्य कारण हैं। मोटापा न केवल मधुमेह बल्कि हृदय रोग, उच्च रक्तचाप जैसे गंभीर रोगों की भी जड़ है। NFHS के आंकड़े बताते हैं कि आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में लगभग 30 प्रतिशत वयस्क जनसंख्या अधिक वजन या मोटापे से ग्रसित है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है।
केरल में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता अच्छी होने के बावजूद खान-पान में बढ़ते फैट और शुगर का सेवन एवं शारीरिक मेहनत की कमी ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। तमिलनाडु में भी शहरी क्षेत्रों में मोटापे का प्रकोप अधिक देखने को मिल रहा है, जहाँ जागरूकता के बावजूद तेज जीवनशैली के कारण लोग फिटनेस पर ध्याना कम दे रहे हैं।
सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञ दोनों इस गंभीर विषय पर काबू पाने के लिए कई पहल कर रहे हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों के माध्यम से लोगों को स्वस्थ आहार अपनाने, नियमित व्यायाम करने और नियमित स्वास्थ्य जांच कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है। NFHS की रिपोर्ट पर आधारित यह समझना आवश्यक है कि यह बढ़ती प्रचलिता आने वाले वर्षों में रोगों के बढ़ने के खतरे को दर्शाती है, जिससे सामाजिक और आर्थिक भार भी बढ़ेगा।
अतः दक्षिणी राज्यों में मधुमेह और मोटापे से संबंधित जागरूकता बढ़ाना, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी उचित कदम उठाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इस दिशा में सभी संबंधित पक्षों का योगदान महत्वपूर्ण होगा ताकि भविष्य में स्वास्थ्य से जुड़ी इन गंभीर समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।

