बेंगलुरु, 27 अप्रैल 2024: अक्सर फेंक दी जाने वाली लकड़ी के टुकड़े जो कहीं बेकार समझे जाते हैं, उन्हें दो बेंगलुरु निवासियों ने नई जिंदगी देने का अनूठा तरीका निकाला है। उनकी इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल रही है बल्कि सजावट एवं घरेलू उपयोग की वस्तुओं के रूप में लकड़ी का पुनः उपयोग भी हो रहा है।
शहर के दो युवा रचनाकार, रवि कुमार और सुमित्रा मेहता, जो पहली बार स्थानीय कचरा प्रबंधन की समस्या को समझते हुए इस दिशा में काम कर रहे हैं, ने पुराने और खराब हो चुके लकड़ी के टुकड़ों को सजावटी फर्नीचर, दीवार सजावट और अन्य उपयोगी उत्पादों में बदल दिया। उन्होंने इस काम को एक व्यवसाय में तब्दील करते हुए लोगों को इस ओर प्रेरित किया है कि वे कूड़े में फेंकने के बजाय लकड़ी को पुनः उपयोग करें।
रवि कुमार ने बताया, “हमने देखा कि बड़ी मात्रा में अच्छी लकड़ी बेकार हो रही है। इसका कारण यह है कि लोग या तो इसे कूड़े में फेंक देते हैं या जलाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। हमने सोचा क्यों न इसे एक नई पहचान दी जाए।” वहीं सुमित्रा ने कहा, “पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ हमारी इस कोशिश से पारंपरिक हस्तशिल्प को भी प्रोत्साहन मिलेगा।”
इन दोनों की पहल ने कई युवाओं को प्रेरित किया है और स्थानीय बाजार में इन उत्पादों की मांग बढ़ गई है। खास बात यह है कि उनके बनाए गए फर्नीचर में विशिष्ट शैली और टिकाऊपन दोनों का समावेश है, जो आम बाजार में मिलने वाले उत्पादों से अलग और बेहतर हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कदम न सिर्फ पर्यावरण की सतत सुरक्षा में मदद करते हैं, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ाते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि वे इस तरह की पहलों को प्रोत्साहित करें और सहायता उपलब्ध कराएं जिससे अधिक लोग ऐसा कर सकें।
इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि रचनात्मक सोच और समर्पण से हम पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास दोनों में संतुलन स्थापित कर सकते हैं। यदि पूरे शहर में इस तरह की सचेतता और काम को बढ़ावा दिया जाए तो बेंगलुरु एक स्वच्छ और हरित शहर बन सकता है।
अधिक जानकारी के लिए रवि कुमार और सुमित्रा मेहता की सोशल मीडिया प्रोफाइल और लोकल वर्कशॉप में संपर्क किया जा सकता है, जो इस काम को और बढ़ावा देने में लगे हैं। यह पहल न केवल लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को भी दर्शाती है।

