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As countries urbanise, 38% of world's population will live in large cities by 2100: Study
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It’s a bad idea to scratch bug bites, research says
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वाशिंगटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें शीर्ष कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मॉडलों का राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों के लिहाज से मूल्यांकन करने का प्रावधान किया गया है। यह नीति संघीय सरकार को ऐसे एआई मॉडल्स का मूल्यांकन करने के लिए अधिकतम 30 दिन का समय प्रदान करती है।

कार्यकारी आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में उपयोग हो रहे एवं विकसित किए जा रहे एआई मॉडल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा न बनें। इस पहल में एआई मॉडलों के डेवलपर्स की भागीदारी पूर्ण रूप से स्वैच्छिक है, लेकिन इसे बढ़ावा देने के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि सहयोग करना हितकारी होगा।

स्रोतों के अनुसार, इस नीति के तहत सरकार यह समझने का प्रयास करेगी कि उच्च स्तरीय एआई मॉडल किस स्तर तक संवेदनशील डाटा, साइबर सुरक्षा, तथा अन्य राष्ट्रीय हितों के दृष्टिकोण से जोखिम उत्पन्न कर सकते हैं। इसमें मॉडल की संरचना, प्रशिक्षण डेटा की प्रकृति, और मॉडल के संभावित दुरुपयोग के पहलुओं की भी समीक्षा की जाएगी।

विशेषज्ञों ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि यह एक सकारात्मक प्रयास है, जिससे एआई तकनीक के माध्यम से पैदा होने वाली जटिल चुनौतियों को संतुलित किया जा सकेगा। वहीं, कुछ आलोचक इस नीति की स्वैच्छिक प्रकृति पर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि इससे सभी डेवलपर्स का समुचित और समान रूप से मूल्यांकन हो पाना संदिग्ध है।

सरकारी अधिकारी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि इस प्रक्रिया का प्राथमिक लक्ष्य अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि एआई तकनीकों के बढ़ते प्रभाव के चलते इस तरह की जांच आवश्यक हो गई है, ताकि संभावित खतरों की समय रहते पहचान कर उपयुक्त कदम उठाए जा सकें।

ट्रम्प प्रशासन के इस आदेश से उम्मीद की जा रही है कि यह अन्य देशों को भी एआई जोखिम प्रबंधन में अधिक सतर्क और जवाबदेह बनने के लिए प्रेरित करेगा। अभी तक इस आदेश के तहत कितने और कौन-कौन से मॉडल मूल्यांकन के दायरे में आएंगे, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

यह नीति अमेरिका में एआई विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक नया कदम माना जा रहा है। सरकार के इस निर्णय से तकनीकी क्षेत्र सहित सुरक्षा एजेंसियों में भी गंभीरता और निगरानी का माहौल बढ़ेगा।

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