Defence ministry evaluates incentives for indigenous military-grade material sourcing in DAP 2026

नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय ने आगामी रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2026 में स्वदेशी सैन्य-ग्रेड सामग्री की सोर्सिंग के लिए प्रोत्साहन उपायों का ध्यानपूर्वक मूल्यांकन शुरू कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और विदेशी निर्भरता को कम करना है। सूत्रों के अनुसार, इस दिशा में एक समान प्रयास पहले भी DAP 2020 के दौरान किया गया था, लेकिन तत्कालीन परिस्थितियों के कारण इसे औपचारिक प्रक्रिया में स्थान नहीं मिल पाया था।

रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी सामग्री की बढ़ती मांग और रक्षा उत्पादन में तेजी लाने के प्रयासों के बीच यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंत्रालय के अंदर चल रही चर्चाओं के अनुसार, इस बार DAP 2026 में ऐसे विशेष प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं जो घरेलू निर्माताओं को वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करें। इससे न केवल रक्षा उत्पादन में गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा में भी भारतीय उत्पादों की स्थिरता बढ़ेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी सैन्य-ग्रेड सामग्री पर केंद्रित प्रोत्साहन योजनाएं भारत की रक्षा वितरण श्रृंखला को मजबूत करेंगी और रक्षा स्वदेशीकरण के लक्ष्य को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाएंगी। इसके अलावा, यह कदम रक्षा उद्योग को निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाएगा, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “पिछले प्रयास में हमें उस समय के कुछ व्यापक नीतिगत और प्रशासनिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था। अब परिस्थितियां बेहतर हैं और हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि DAP 2026 में स्वदेशी सामग्री के लिए प्रोत्साहन स्पष्ट रूप से और प्रभावी ढंग से शामिल हो।”

देश के रक्षा क्षेत्र में निर्माताओं, टेक्नोलॉजिस्ट और नीति निर्माताओं के बीच इससंबंधी तैयारियां और सुझाव भी जोर-शोर से जारी हैं। विश्लेषकों के अनुसार, जब तक ऐसा नियम प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो जाता, तब तक किफायती और गुणवत्ता संपन्न सैन्य उपकरणों की स्थानीय आपूर्ति करना चुनौतीपूर्ण रहेगा।

इस नई पहल से भारत के रक्षा उत्पाद एवं औद्योगिक आधार को मजबूती मिलेगी और यह व्यापक रक्षा राजस्व में स्थायी वृद्धि के लिए आधारशिला साबित हो सकती है। DAP 2026 में स्वदेशी सामग्री के प्रोत्साहन पर अंतिम निर्णय जारी होने के बाद विस्तृत दिशानिर्देश और नियम सार्वजनिक किए जाएंगे जो स्थानीय उद्योगों के लिए रेड कार्पेट की तरह काम करेंगे।

अंत में, यह देखा जाना बाकी है कि यह पहल वास्तव में कैसे प्रदेशीय और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को प्रभावित करती है, लेकिन यह स्पष्ट है कि भारत अब रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।

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