नई दिल्ली। भारत की रक्षा खरीद नीति में एक बड़ा परिवर्तन आता दिख रहा है, जिसमें देश लंबे समय तक चलने वाले रक्षा ड्रोन खरीदने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले 18 से 24 महीनों के भीतर टैक्टिकल ड्रोन, लूटरिंग मुनिशन और अन्य अनमैन सिस्टम पर कुल मिलाकर 2 अरब डॉलर से अधिक का निवेश हो सकता है।
अभी तक भारत की ड्रोन खरीद नीति मुख्य रूप से त्वरित और सीमित अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स पर आधारित थी, लेकिन बदलती सुरक्षा आवश्यकताओं और तकनीकी विकास के चलते लंबी अवधि के ठेके अधिक प्रचलित हो रहे हैं। इससे न केवल उत्पादन में स्थिरता आएगी, बल्कि रक्षा वैज्ञानिकों को भी नवीनतम तकनीक के साथ ज्यादा समय तक काम करने का मौका मिलेगा।
डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन ड्रोन सिस्टम्स का इस्तेमाल सीमा सुरक्षा, निगरानी, और टारगेटिंग के नए तरीकों के लिए किया जाएगा। खासतौर पर लूटरिंग मुनिशन उन परिस्थितियों में फायदेमंद साबित होंगे जहां तत्काल हमला करना आवश्यक हो।
विदेशी रक्षा कंपनियों के साथ भी भारत की बातचीत जारी है, ताकि इन उन्नत ड्रोन तकनीकों का स्थानीय उत्पादन शुरू किया जा सके। इससे न केवल आत्मनिर्भरता बढ़ेगी बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजन होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दिशा भारत की सैन्य ताकत को अगले स्तर पर ले जाएगी।
सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि इस बड़े निवेश से भारतीय सेना को भविष्य में रणनीतिक लाभ मिलेगा, खासकर उनके संचालन क्षेत्रों में जहां मानव सैनिकों का आवागमन जोखिम भरा हो। ड्रोन तकनीक का विकास और उपयोग युद्ध के मैदान का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है।
अतः यह स्पष्ट है कि भारत की रक्षा खरीद नीति में लंबी अवधि के ड्रोन सिस्टम्स को शामिल करना एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम है, जो न केवल आधुनिक युद्ध तकनीक से कदम मिलाएगा बल्कि भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा में भी मजबूत स्थिति देगा। आने वाले महीनों में इस दिशा में और अधिक घोषणाएं होने की संभावना है।

