बेंगलुरु। कर्नाटक राज्य की राजनीति में एक नई पहचान बनाने वाले शिवराम हेगड़े परमेश्वर ने हाल ही में उपमुख्यमंत्री के पद की शपथ ली है। 74 वर्षीय परमेश्वर कांग्रेस पार्टी के भरोसेमंद संगठनात्मक स्तंभ और राज्य में दलित वर्ग के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं। उनका राजनीतिक करियर लंबे समय से लोकहित और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित रहा है।
परमेश्वर का जन्म और प्रारंभिक जीवन कर्नाटक के एक दलित परिवार में हुआ। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने विज्ञान की पढ़ाई करते हुए समाज सेवा की प्रेरणा प्राप्त की। वर्षों से वे कांग्रेस पार्टी के अंदर से संगठन को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाते आए हैं। उनके अनुभव और निष्पक्ष निर्णय क्षमता ने उन्हें पार्टी में नेतृत्व के पद पर पहुंचाया है।
कर्नाटक की राजनीति में दलितों को प्रतिनिधित्व देने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए परमेश्वर ने कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। वे सामाजिक समरसता पर जोर देते हैं और अलग-अलग वर्गों के बीच एकता स्थापित करने के लिए लगातार प्रयासरत रहे हैं। उनके नेतृत्व में कई विकास योजनाएँ और कल्याणकारी कार्यक्रम लागू किए गए हैं जो विशेषकर पिछड़े और कमजोर तबकों के लिए अभिवृद्धि का साधन बनें।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परमेश्वर के अनुभव और संगठन में पकड़ से कांग्रेस पार्टी को राज्य में मजबूती मिलेगी। उनकी छवि एक समर्पित, ईमानदार और कामकाजी नेता की है जो जनभावनाओं को समझने में पारंगत हैं। उपमुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी प्राथमिकता राज्य के विकास के साथ-साथ सामाजिक न्याय के मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की होगी।
परमेश्वर की यह नियुक्ति कर्नाटक में दलित समुदाय के लिए नई आशा की किरण है। उनकी अगुवाई में कांग्रेस पार्टी का लक्ष्य समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना और प्रगति के नए मुकाम हासिल करना है। आने वाले समय में उनकी नीतियाँ और कार्यशैली यह तय करेंगी कि वे राजनीतिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को कितनी कुशलता से निभा पाते हैं।
इस नए दौर में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री के रूप में परमेश्वर के कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं। वे न केवल एक अनुभवी राजनेता हैं, बल्कि दलित समुदाय के लिए आवाज उठाने वाले एक सशक्त नेता भी हैं, जो राज्य की राजनीति को नई दिशा देने में सक्षम हैं।

