IE यूनिवर्सिटी के डीन रफिफ स्रोर का बयान: एआई के ज्ञान व अर्थ पर गलत प्रभाव
स्पेन के IE यूनिवर्सिटी के प्रोग्राम्स डीन रफिफ स्रोर ने हाल ही में कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) छात्रों के बीच “ज्ञान की एक झूठी छवि” बना रहा है। उनका मानना है कि इस वजह से एआई को विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों में शामिल करने के मामले में सावधानी बरतनी चाहिए।
रफिफ स्रोर ने शिक्षा प्रणाली में एआई के प्रभावों पर गहराई से विचार करते हुए यह स्पष्ट किया कि कहीं यह तकनीक छात्रों की सोचने और समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि यदि बेपरवाही से एआई को पाठ्यक्रमों का हिस्सा बनाया गया, तो छात्र इसका दुरुपयोग कर सकते हैं या सतही ज्ञान के साथ संतुष्ट हो सकते हैं।
ऐसे समय में जब शिक्षण संस्थान डिजिटल युग की मांगों के अनुसार अपने तरीकों में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं, रफिफ स्रोर की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह शिक्षकों, नीति निर्धारकों और अकादमिक क्षेत्र को सतर्क करती है। वे कहते हैं कि तकनीक को एक सहायक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए न कि सीखने की प्रक्रिया का पूरी तरह विकल्प।
उन्होंने यह भी कहा कि एआई को सही मात्रा और सही संदर्भ में शामिल करना चाहिए, जिससे छात्रों की आलोचनात्मक सोच विकसित हो और वे विषय की गहराई से समझ प्राप्त कर सकें। इसके विपरीत, केवल एआई पर निर्भरता से ज्ञान की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है, जो लंबे समय में उनके शैक्षिक और व्यावसायिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों का स्वागत करते हुए, रफिफ स्रोर ने यह भी सुझाव दिया है कि छात्रों को इस तकनीक के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं की जानकारी देनी चाहिए ताकि वे जिम्मेदारी से इसका उपयोग कर सकें।
यह बयान शिक्षा जगत में एआई के सही उपयोग और पाठ्यक्रम विकास की दिशा में विचारशील बहस को जन्म देने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संदर्भ में नीतिगत बदलाव आवश्यक हैं ताकि तकनीक का प्रभावी एवं नैतिक उपयोग हो सके।
इस तरह की जागरूकता न केवल छात्रों के लिए बल्कि शिक्षकों और शिक्षा संस्थानों के लिए भी जरुरी है ताकि वे भविष्य में शिक्षा की गुणवत्ता को सुनिश्चित कर सकें।

