नई दिल्ली। भारत के चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने के मकसद से भारतीय काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) डिजिटल हेल्थ, जैव-निर्माण (bio-manufacturing), और सतत विकास के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। यह पहल देश के 2047 तक के रोडमैप को आकार देने में अहम भूमिका निभाएगी।
ICMR ने हाल ही में अपनी नई रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि वे स्वास्थ्य क्षेत्र में क्षमता निर्माण (capacity building) और वैश्विक सहयोग (global collaboration) पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। डिजिटल स्वास्थ्य के माध्यम से रोगों के जल्द निदान और बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का विकास किया जाएगा, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा की पहुंच बढ़ेगी।
जैव-निर्माण के क्षेत्र में ICMR की पहल स्वास्थ्य के लिए जरूरी जैविक उत्पादों के उत्पादन को सस्ती और सहज बनाने पर केंद्रित है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से टीकों, दवाओं और जैविक सामग्री का निर्माण देश में स्वदेशी स्तर पर होगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी।
सतत विकास को लेकर ICMR ने यह सुनिश्चित किया है कि स्वास्थ्य सेवाएं पर्यावरण के अनुरूप हों और संसाधनों का कुशलतम उपयोग हो। इन योजनाओं के तहत स्वच्छ ऊर्जा, प्रभावी जल प्रबंधन और कचरा निपटान जैसी नीतियां लागू कर स्वास्थ्य क्षेत्र को हरित बनाया जाएगा।
ICMR ने विश्व के अलग-अलग देशों के साथ सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया है ताकि नवाचार, शोध और विकास में सामूहिक प्रयास किए जा सकें। वैश्विक विशेषज्ञों के साथ साझेदारी से भारतीय चिकित्सा अनुसंधान में नई तकनीक और ज्ञान का समावेश होगा।
संस्थान का यह मानना है कि भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में ये पहल देश की स्वदेशी ताकत को मजबूत करेंगी और आने वाली पीढ़ियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने में अहम भूमिका निभाएंगी। 2047 तक भारत को स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र बनाने के लिए ICMR की यह रणनीति बड़ी उम्मीदें जगा रही है।
इन सब प्रयासों से न केवल भारत के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देश की चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा की प्रतिस्पर्धा में बढ़ोतरी होगी। यह विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम है जो देश के स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह से नया स्वरूप देगा।

