नई दिल्ली। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे की गिरावट के साथ 95.35 पर आ गया। मार्केट विश्लेषकों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड के बढ़ते दामों ने निवेशकों के मूड पर नकारात्मक असर डाला और यह गिरावट का प्रमुख कारण बनकर उभरा है।
फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हुई तेजी से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। बढ़ती तेल कीमतों ने भारत के आयात खर्च को बढ़ाया है, जिससे मुद्रा पर दबाव बढ़ा है। तेल की कीमतों में तेजी के कारण विदेशी निवेशकों का रुख सख्त हो गया है और इससे रुपये की कमजोर स्थिति बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और बचत दर में उतार-चढ़ाव से भी मार्केट की संवेदनशीलता बढ़ी है, जो रुपया पर दबाव डाल रही है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित वृद्धि की अटकलों ने भी डॉलर को मजबूती प्रदान की है, जिससे अन्य मुद्राओं जैसे रुपया कमजोर हुए हैं।
मौजूदा कारोबारी सत्र में रुपया नई दिल्ली में खुलते ही 95.18 के स्तर से 95.35 तक कमजोर हुआ। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि ब्रेंट क्रूड के दाम उच्च स्तर पर बने रहते हैं, तो रुपये की गिरावट जारी रह सकती है। वहीं, घरेलू आर्थिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय माहौल में सुधार आने पर मुद्रा को समर्थन मिल सकता है।
उल्लेखनीय है कि भारत एक बड़ा तेल आयातक देश होने के कारण तेल के दामों में वृद्धि सीधे उसके विनिमय दर पर असर डालती है। यह स्थिति महंगाई को भी बढ़ावा देती है और आर्थिक विकास की गति धीमी कर सकती है। इसलिए, सरकार और केंद्रीय बैंक को इस पर विशेष ध्यान देना होगा ताकि रुपये की कीमतों में स्थिरता लाई जा सके।
निवेशक और व्यापारी इस समय बाजार की चाल पर नजर बनाए हुए हैं और वैश्विक समाचारों व आर्थिक रिपोर्टों को बारीकी से आंक रहे हैं ताकि भविष्य की योजना बनाई जा सके। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान सतर्क रहना आवश्यक है और जोखिमों को सावधानीपूर्वक प्रबंधित करना चाहिए।

