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Vedant Shrivastava, Nisarga Adhikary and Sarthak Sidhant | The Gen Z trio that took on the CBSE

नई दिल्ली। वेदांत श्रीवास्तव, निसर्गा अधिकारी और सार्थक सिद्धांत, जो जनरेशन Z के तीन ऐसे विद्यार्थी हैं जिन्होंने सार्वजनिक मंचों पर CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाई थी, अब साकार रूप में सही ठहराए गए हैं। हाल ही में CBSE बोर्ड ने इस मार्किंग सिस्टम में पाए गए दोषों को स्वीकार करते हुए माना कि उनके द्वारा लागू की गई प्रणाली में कुछ खामियां मौजूद थीं।

यह खबर आने के बाद से शैक्षणिक जगत में हलचल मची हुई है, क्योंकि यह मामला छात्रों के हक और न्याय के विषय में था। पिछले कुछ महीनों में तीनों युवाओं को इन खामियों के खिलाफ मुखर होने के कारण सोशल मीडिया एवं अन्य सार्वजनिक मंचों पर निर्दयतापूर्वक ट्रोल किया गया था। आलोचना और विरोध के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और कई बार इस प्रणाली के सुधार के लिए आवाज उठाई।

CBSE के अधिकारियों ने अभी तक विस्तार से इस प्रणाली की जांच की है और सुधार के लिए एक कमेटी भी बनाई गई है। बोर्ड ने कहा है कि आने वाले समय में इस प्रणाली को सुधार कर अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्वीकारोक्ति से शिक्षा प्रणाली में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं जो विद्यार्थियों के हित में होंगे। साथ ही, यह घटना भविष्य में छात्रों को अपनी बात खुलकर कहने और गलत नीतियों के खिलाफ खड़े होने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

शैक्षणिक जगत में यह उदाहरण भी स्थापित करता है कि युवा पीढ़ी न केवल आलोचना करने में सक्षम है, बल्कि वे सिस्टम में आवश्यक सुधार की मांग भी कर सकते हैं। वेदांत, निसर्गा और सार्थक ने न केवल सोशल मीडिया पर बल्कि अन्य मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बनाई है।

अंततः, इस विवाद ने यह दिखाया है कि जब सही बात के लिए आवाज उठाई जाए तो बड़ी संस्थाएं भी मानती हैं कि सुधार आवश्यक है और संभव है। CBSE बोर्ड का यह कदम छात्रों के विश्वास को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

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