वाशिंगटन, 27 अप्रैल: एक अमेरिकी न्यायालय ने ट्रम्प प्रशासन द्वारा लागू किए गए H-1B वीज़ा के लिए 100,000 डॉलर के शुल्क को अवैध करार दिया है। इस फैसले ने उस नीति को पलट दिया है, जिसने H-1B वीज़ा आवेदन की प्रक्रिया को कड़ी कर दिया था और आवेदन की संख्या में भारी गिरावट लाई थी।
H-1B वीज़ा, जो उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है, की मांग सालों से बढ़ती जा रही थी। लेकिन ट्रम्प प्रशासन के दौरान इस वीज़ा पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की योजना तैयार की गई थी, जिसका उद्देश्य विदेशी श्रमिकों की संख्या को कम करना और अमेरिकी नौकरी बाजार को प्राथमिकता देना था।
हालांकि, इस अतिरिक्त $100,000 शुल्क को लेकर काफी विवाद हुआ। आलोचकों ने इसे एक छुपा हुआ कर माना था, जो कि H-1B वीज़ा आवेदकों के लिए असंवैधानिक था। इस मामले में दायर याचिका के जवाब में अब अदालत ने इस शुल्क को गैरकानूनी घोषित कर दिया है।
न्यायालय के निर्णय से मुख्य रूप से उन विदेशी पेशेवरों को राहत मिली है जो अमेरिका में अपने कौशल का प्रदर्शन करना चाहते हैं। यह फैसला इस बात का संकेत है कि अदालतें प्रवासी नीतियों पर कड़ी निगरानी रख रही हैं और किसी भी ऐसी नीति को अस्वीकार कर सकती हैं जो अनुचित या अवैध हो।
इससे पहले ट्रम्प प्रशासन की नीति ने H-1B आवेदन प्रक्रिया को बहुत प्रभावित किया था। इस नीति के लागू होने के बाद, नए आवेदन संख्या में काफी कमी आई थी, जिससे कई तकनीकी कंपनियों को विदेशी प्रतिभाओं की कमी का सामना करना पड़ा। नतीजतन, अमेरिकी टेक उद्योग में विकास की संभावनाएं भी प्रभावित हुईं।
विपक्षी दल और प्रवासी अधिकार समर्थक समूह इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह न्यायालय का निर्णय न केवल H-1B आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाएगा बल्कि विदेशी विशेषज्ञों के लिए अमेरिका को एक आकर्षक स्थल बनाएगा। वहीँ, ट्रम्प के समर्थकों का तर्क रहा है कि ऐसे उच्च शुल्क अमेरिकी रोजगार को बचाने के लिए जरूरी थे।
वर्तमान में, अमेरिका में उच्चकुशल विदेशी श्रमिकों की मांग लगातार बढ़ रही है और H-1B वीज़ा इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। इस न्यायालय के फैसले के बाद उम्मीद है कि वीज़ा आवेदन फिर से सामान्य स्तर पर आएंगे और अमेरिकी कंपनियों को वैश्विक प्रतिभा से जुड़ने में सहायता मिलेगी।
इस फैसले का अमल तुरंत होगा और संयुक्त राज्य अमेरिका के आव्रजन विभाग को इसके अनुसार अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय अवैध कर संग्रहण के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मिसाल प्रस्तुत करता है और भविष्य में भी ऐसे अप्रासंगिक शुल्कों को चुनौती देने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

