नई दिल्ली: मोटापा कम करने के लिए जारी इंजेक्शनों के बढ़ते प्रभावों के बीच विशेषज्ञों ने एक नई चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा कम करने वाले कुछ इंजेक्शनों के कारण शरीर के मांसपेशियों का भी नुकसान हो सकता है। यह नुकसान अक्सर ध्यान में नहीं आता, लेकिन यह वजन घटाने की प्रक्रिया में गंभीर भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापा कम करने वाली ये इंजेक्शनों से करीब एक तिहाई वजन वास्तव में मांसपेशियों के नुकसान के कारण होता है। इसका अर्थ यह है कि व्यक्ति केवल वसा ही नहीं, बल्कि मांसपेशियां भी खोता है, जो शरीर की ताकत, सहनशक्ति और समग्र स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
इन्हीं मांसपेशी घटाव को मीडिया में ‘ओजेम्पिक बट’ के नाम से जाना जाने लगा है, जो कि एक आम दुष्प्रभाव के रूप में सामने आया है। इस स्थिति में शरीर की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं जिससे मोटापे के रोकथाम के लिए ली जा रही दवाओं का उद्देश्य कुछ हद तक प्रभावित होता है।
मोटापा कम करने वाली दवाओं के इस अप्रत्याशित दुष्प्रभाव की पहचान के कारण, वैज्ञानिक नई दवाओं और उपचार पद्धतियों पर काम कर रहे हैं जो मांसपेशियों की रक्षा भी कर सकें। हाल ही में विकसित की गई एक नई दवा पर शोधकर्ता सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं जो इस दुष्प्रभाव को कम कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापा कम करने के उपचार में मांसपेशियों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होनी चाहिए जितनी कि वसा को कम करना। मांसपेशियों के बिना शरीर का मेटाबोलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे वजन दोबारा बढ़ने का खतरा रहता है। इसलिए ये नई दवाएं व्यावहारिक और दीर्घकालिक समाधान प्रदान कर सकती हैं।
स्वास्थ्य प्रेमियों और मोटापे से जूझ रहे लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी वजन घटाने वाली दवा को डॉक्टर की सलाह और निगरानी में ही लें। अपने आहार, व्यायाम और जीवनशैली में संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।
इस नई खोज से स्वास्थ्य जगत में उम्मीद जग रही है कि मोटापे से लड़ने में यह एक नई दिशा प्रदान करेगी, और जो लोग शरीर की मांसपेशियों के नुकसान की चिंता करते हैं, उनके लिए राहतकारी साबित होगी। विशेषज्ञ आगे भी इस क्षेत्र में शोध जारी रखने पर जोर दे रहे हैं ताकि आने वाले समय में और भी प्रभावी और सुरक्षित उपचार उपलब्ध हो सकें।

