राजस्थान के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस से निकली क्षेत्रीय पार्टियों से पुनः पार्टी में लौटने और राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष की एकता मजबूत करने का समर्थन किया है। उन्होंने यह प्रस्ताव आगामी राजनीतिक लड़ाइयों के मद्देनजर विपक्ष को संगठित करने की आवश्यकता को लेकर व्यक्त किया।
गहलोत के यह बयान शिव सेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत के सुझाव पर आए, जिन्होंने हाल ही में कहा था कि कांग्रेस से निकली सभी पार्टियों को मूल संगठन में लौटना चाहिए और विपक्ष के एकजुट चेहरे के रूप में राहुल गांधी का समर्थन करना चाहिए।
राजनीतिक माहौल को देखते हुए गहलोत ने कहा कि इस समय देश को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट विपक्ष की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा, “इस सुझाव में सार्थकता है। ऐसी पार्टियां जो कांग्रेस से अलग हुई हैं, उन्हें सोचना चाहिए कि क्या वापस लौटकर वे राष्ट्रीय हित में सहयोग कर सकती हैं,” उन्होंने जोर दिया कि विपक्ष के लिए मजबूती ही प्राथमिकता होनी चाहिए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वोटरों के समक्ष ‘इंडिया ब्लॉक’ को स्पष्ट नेतृत्व ढांचा पेश करना चाहिए और वर्तमान में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख विरोधी के रूप में देखा जा रहा है।
गहलोत ने कहा कि यदि सभी विपक्षी पार्टियां एक साथ राहुल गांधी का समर्थन करें, तो यह देश की राजनीतिक स्थिति और चुनावी रुझानों को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आह्वान केवल उन पार्टियों के लिए है जो कांग्रेस से निकली हैं, न कि उन संगठनों के लिए जिनकी विचारधारा और इतिहास स्वतंत्र है।
उन्होंने शिव सेना, वामपंथी पार्टियां जैसे सीपीआई(एम), सीपीआई और समाजवादी पार्टी को ऐसे संगठन बताया जिनका विकास स्वतंत्र रूप से हुआ है और इसलिए उनसे कांग्रेस में वापसी की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
अशोक गहलोत ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को दरपेश बढ़ती चुनौतियों पर चिंता जताई और कहा कि लोकतंत्र की रक्षा विपक्ष की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं को राजनीति में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया तथा छात्रों और पेशेवरों से अपील की कि वे विचारधारा और राष्ट्रीय हित के आधार पर सार्वजनिक जीवन में योगदान दें।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां आज के नागरिकों और राजनेताओं को इसी दौर में निभाए गए उनके योगदान के आधार पर आंकेगी, इसलिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है।
गहलोत के यह बयान विपक्षी गठबंधन के भीतर नेतृत्व, एकता और दीर्घकालिक रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ सकते हैं, जो भाजपा को आगामी चुनावों में कड़ी टक्कर देने के लिए आवश्यक है।
IANS की इनपुट के साथ

