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नई दिल्ली। निजी डेंटिस्ट्री की बढ़ती कीमतें आम जनता के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। बीबीसी योर वॉइस को मिले कई लोगों के अनुभव बताते हैं कि उच्च दंत चिकित्सा खर्च ने उन्हें आर्थिक तंगी में डाल दिया है। कई लोग अपनी मौजूदा बचत का उपयोग करना पड़ रहा है, जबकि कुछ लोगों को जरूरी दंत उपचार के लिए देरी करनी पड़ रही है।

अंग्रेज़ी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली NHS में डेंटिस्ट की कमी ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया है। NHS पर भरोसा करने वाले मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है या फिर वे निजी क्लीनिक की ओर रुख करने को मजबूर हैं, जहाँ खर्च बहुत अधिक है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की स्वास्थ्य देखभाल प्रभावित हो रही है।

श्रेया वर्मा, जो एक छात्रा हैं, बताती हैं कि उनके दांतों की समस्या इतनी गंभीर हो गई थी कि उन्होंने अपनी यूनिवर्सिटी की बचत में से पर्याप्त धनराशि निकाली और निजी डेंटिस्ट के पास जाकर इलाज कराया। उनका कहना है, “मुझे NHS के तहत इलाज के लिए कई महीनों तक इंतजार करना पड़ता, लेकिन दर्द सहन करना मुश्किल था। निजी क्लीनिक में खर्चे इतने बढ़ गए हैं कि यह एक बड़ा आर्थिक बोझ बन गया है।”

विशेषज्ञ बताते हैं कि दंत चिकित्सा के क्षेत्र में इन दिक्कतों का कारण कर्मचारियों की कमी, बढ़ती मांग और महंगे उपकरण व सामग्री हैं। इसके कारण लागत बढ़ती जा रही है जो सीधे मरीजों पर असर डालती है। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और अधिक डेंटिस्ट की भर्ती इसे कम करने के लिए जरूरी कदम बताए जा रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कई क्षेत्रों में NHS डेंटिस्ट सेवाओं की कमी है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या वे निजी सेवाओं पर निर्भर हो जाते हैं। यह स्थिति खासकर उन व्यक्तियों के लिए चिंताजनक है जिनकी आय सीमित है, क्योंकि दंत चिकित्सा को प्राथमिकता देने में वे असमर्थ होते हैं।

इस समस्या के समाधान के लिए नीति निर्धारकों को तुरंत कदम उठाना होगा ताकि डेंटल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़े और लागत कम हो। यही नहीं, लोगों को जागरूक और सस्ता उपचार उपलब्ध कराने की भी आवश्यकता है जिससे वे अपने दांतों की देखभाल समय पर कर सकें।

अंत में, यह स्पष्ट है कि निजी दंत चिकित्सा सेवाओं की महंगाई और NHS में डेंटिस्ट की कमी का असर सीधे जनता की जेब पर पड़ रहा है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सामूहिक प्रयास और सरकारी समर्थन समय की मांग है।

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