खंडवा: भारत के प्रमुख तकनीकी संस्थान, आईआईटी-खंडवा के निदेशक मनींद्र अग्रवाल ने हाल ही में एक अनूठा कदम उठाते हुए साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में प्रतिभाशाली छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए नई पहल की घोषणा की है। संस्थान अब स्नातक स्तर पर साइबर सुरक्षा में बीए (बैचलर) की डिग्री शुरू करने जा रहा है।
विशेष बात यह है कि इस नए पाठ्यक्रम में भर्ती प्रक्रिया परंपरागत तरीके से, जैसे जेईई (एडवांस्ड) के माध्यम से नहीं होगी। इसके बजाय, चयन एक हैकाथॉन के माध्यम से किया जाएगा, जो छात्रों की वास्तविक हैकिंग और साइबर सुरक्षा कौशल का परीक्षण करेगा। यह निर्णय छात्रों के व्यावहारिक कौशल और समस्या सुलझाने की क्षमता को महत्व देते हुए लिया गया है।
आईआईटी-खंडवा के निदेशक मनींद्र अग्रवाल ने बताया कि, “हमें उन छात्रों को मौका देना है जो सिर्फ बोर्ड या प्रवेश परीक्षाओं में बेहतर अंक लाते हैं, बल्कि वे जो साइबर जगत की चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं। हैकाथॉन की मदद से हम ऐसे प्रतिभाशाली युवा खोजेंगे जो देश की साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने में योगदान दे सकें।”
यह पहल देश में साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ती जरूरत को ध्यान में रखते हुए की गई है। जैसे-जैसे डिजिटल इंडिया का विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे साइबर हमलों की घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है। ऐसे में दक्ष और प्रवीण पेशेवरों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
हैकाथॉन के जरिए छात्रों का चयन करने का तरीका संस्थान के लिए पहले भी काम कर चुका है, जहां तकनीकी कौशल का अभ्यास और प्रतिस्पर्धा दोनों का अच्छा संतुलन तैयार हो पाता है। इस नई बैचलर डिग्री को लेकर शिक्षाविदों और विशेषज्ञों से सकारात्मक प्रतिक्रिया भी मिल रही है।
यह कोर्स विद्यार्थियों को नेटवर्क सुरक्षा, क्रिप्टोग्राफी, एथिकल हैकिंग, डेटा प्रोटेक्शन समेत अनेक सुरक्षा प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन कराएगा। साथ ही उनके हाथों-हाथ प्रैक्टिकल अनुभव भी मिलेगा जिससे वे उद्योग की मांग के अनुरूप बन सकें।
आईआईटी-खंडवा की इस नई पहल से साफ संकेत मिलता है कि तकनीकी शिक्षा अब केवल पारंपरिक परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वास्तविक दुनिया की समस्याओं को सुलझाने वाले विशेषज्ञ उभरेंगे। इससे युवाओं को भी अपने कौशल साबित करने का एक नया मंच मिलेगा, जो भविष्य में उनकी सफलता के लिए निर्णायक साबित होगा।
संक्षेप में, आईआईटी-खंडवा का यह कदम भारतीय तकनीकी शिक्षा की दिशा को नया मोड़ देने वाला है और उम्मीद है कि इससे साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में एक मजबूत पीढ़ी तैयार होगी।

