नई दिल्ली: आज के तकनीकी युग में, कई ऐसी उपकरणें हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन गई हैं जो बिना स्पर्श किए काम करती हैं, जैसे कि स्मार्ट वॉशबेसिन और रिमोट कंट्रोल। इन उपकरणों के काम करने की क्षमता के पीछे छिपा है एक अद्वितीय विज्ञान, जिसमें अदृश्य इन्फ्रारेड (IR) तरंगे और दोहरीकरण प्रौद्योगिकी का महत्वपूर्ण योगदान है।
इन्फ्रारेड LEDs द्वारा उत्सर्जित अवर्णनीय प्रकाश तरंगे, जिन्हें हमारी आंखें देख नहीं पातीं, फ़ोटोडायोड्स के माध्यम से पकड़ी जाती हैं। ये इन्फ्रारेड प्रकाश तरंगें, ऑप्टिक्स (प्रकाश विज्ञान) और संघनित पदार्थ भौतिकी के अनुप्रयोगों का जादू हैं। जब ये तरंगे सेंसर तक पहुँचती हैं, तो वे सेंसर के इलेक्ट्रॉनों के साथ परस्पर क्रिया करती हैं, जिससे एक सिग्नल उत्पन्न होता है। यही सिग्नल उस डिवाइस को आवश्यक क्रिया करने का संकेत देता है।
स्मार्ट वॉशबेसिन में IR LED और फ़ोटोडायोड की जोड़ी पानी के प्रवाह को नियंत्रित करती है। जब हाथ वॉशबेसिन के आगे आने लगते हैं, तो इन अवर्णनीय IR तरंगों में परिवर्तन होता है, जिसे सेंसर तुरंत पहचान लेते हैं और नल को खोलने का आदेश जारी करते हैं। इससे न केवल पानी की बचत होती है, बल्कि स्वच्छता में भी सुधार होता है क्योंकि उपयोगकर्ता को नल को छूना नहीं पड़ता।
यह तकनीक क्वांटम भौतिकी के सिद्धांतों पर आधारित है, जहां प्रकाश की कण-कणिकाएँ और उनकी ऊर्जा की अवस्थाएं इलेक्ट्रॉन के साथ बातचीत करती हैं। इस तरह, रोज़मर्रा की वस्तुएं जैसे वॉशबेसिन, जो आमतौर पर सरल दिखती हैं, वास्तव में आधुनिक विज्ञान और तकनीक का परिणाम होती हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि IR तकनीक की सहायता से और भी कई उन्नत उपकरण बनाए जा रहे हैं जो मानव जीवन को और अधिक आरामदायक और सुरक्षित बनाते हैं। यह जादू नहीं बल्कि विज्ञान की लगातार हो रही प्रगति है जो हमारे आस-पास के वातावरण को और भी स्मार्ट बनाती है।

