नई दिल्ली: ‘एशियाई स्क्वाट’ एक विशिष्ट तरीके की स्क्वाट स्थिति है, जिसमें व्यक्ति पूरी तरह से जमीन पर गुटनों के बल बैठता है, पैर पूरी तरह से जमीन पर टिके होते हैं और शरीर का भार संतुलित होता है। यह स्थिति विशेष रूप से एशियाई देशों में आम देखी जाती है, जहां लोग लंबे समय तक इस मुद्रा में आराम करते हैं, खाना खाते हैं या बातचीत करते हैं।
इस स्टाइल की स्क्वाटिंग की खासियत यह है कि यह शरीर के नितंबों, घुटनों और टखनों को अधिक लचीला बनाती है। साथ ही, इसे करने से पाचन प्रक्रिया भी बेहतर होती है क्योंकि यह पेट को दबाव में लाए बिना आरामदायक बैठने की स्थिति प्रदान करती है।
हालांकि, पश्चिमी देशों में यह मुद्रा कम देखी जाती है, जिसका मुख्य कारण है कि वहाँ के लोगों की जीवनशैली और शारीरिक गतिशीलता में यह आदत शामिल नहीं होती। कई लोग इसे करना कठिन पाते हैं क्योंकि उनकी घुटने और टखनों की लचक कम होती है, जिससे स्क्वाट करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में यह मुद्रा अपनानी है, तो उसे धीरे-धीरे घुटनों, टखनों और नितंबों की मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाना चाहिए। यह अभ्यास योग, स्ट्रेचिंग और धीरे-धीरे नीचे बैठने के अभ्यास से संभव है।
क्या आपको ‘एशियाई स्क्वाट’ करनी चाहिए? यदि आपकी शारीरिक क्षमता और लचक इसे अनुमति देती है, तो यह आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। यह आपकी प्राकृतिक मुद्रा को बेहतर बनाता है और ज़्यादा समय तक आरामदायक बैठने में मदद करता है। लेकिन यदि आपको उसके दौरान दर्द या असुविधा हो रही हो, तो इसे करने से बचना चाहिए और अधिक अभ्यास के बाद ही कोशिश करनी चाहिए।
अंततः, ‘एशियाई स्क्वाट’ एक प्राकृतिक और प्राचीन मुद्रा है, जो शारीरिक स्वास्थ्य के लिहाज से लाभकारी मानी जाती है। इसे अपनाने में सावधानी बरतनी चाहिए और किसी विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित होगा, ताकि आप इसे सुरक्षित और प्रभावी तरीके से कर सकें।

