कम खर्च, हाइब्रिड जॉब्स और वर्क-लाइफ बैलेंस से टियर-2 शहरों में बढ़ी रियल एस्टेट की मांग
नई दिल्ली: भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में बदलाव की नई लहर देखने को मिल रही है। मेट्रो शहरों की तुलना में टियर-2 और टियर-3 शहरों में अब निवेशकों और खरीदारों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, वर्क-लाइफ बैलेंस की मांग, हाइब्रिड काम के अवसर और मेट्रो शहरों की तुलना में बेहतर किफायती जीवनशैली इस बदलाव के प्रमुख कारण हैं।
परंपरागत रूप से मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु जैसे बड़े शहर रियल एस्टेट के केंद्र माने जाते थे, लेकिन अब युवा पीढ़ी खासकर जनरेशन ज़ेड अपने काम और जीवन के संतुलन को प्राथमिकता दे रही है। हाइब्रिड वर्क मॉडल के कारण कार्यालय से काम करने का पूर्व दबाव कम हुआ है, जिससे लोग बेहतर जीवन स्तर और कम आवास लागत वाले शहरों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि टियर-2 शहरों में प्रॉपर्टी की कीमत मेट्रो की तुलना में आधी या उससे भी कम होती है, जिससे पहली बार घर खरीदने वालों और निवेशकों दोनों के लिए यह क्षेत्र आकर्षक बन गया है। अहमदाबाद, जयपुर, पुणे, चंडीगढ़ जैसे शहरों में न केवल रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ी है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है।
एक वरिष्ठ रियल एस्टेट एनालिस्ट का कहना है, “मेट्रो सिटी के भारी ट्रैफिक, महंगी जीवनशैली और प्रदूषण से परेशान होकर युवा वर्ग अब अपने करियर के साथ-साथ खुशहाल जीवन की भी तलाश में हैं। यही वजह है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों ने निवेश के लिहाज से नई उम्मीदें जगाई हैं।”
सरकार द्वारा भी इन क्षेत्रों में इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारों और पब्लिक सुविधाओं के विस्तार ने इन शहरों की क्षमता को और बढ़ा दिया है। बेहतर सड़कें, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सुधार निवेशकों का भरोसा बढ़ा रहे हैं।
रीयल एस्टेट कंपनियां भी इस रुझान को भांपते हुए टियर-2 शहरों में आकर्षक और आधुनिक आवासीय परियोजनाएं विकसित कर रही हैं ताकि ग्रामीण और शहरी जीवन के बीच का संतुलन बना रहे।
इस बदलाव को देखते हुए संभावित निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे इन छोटे शहरों के विकास को ध्यान में रखते हुए जल्द निर्णय लें, क्योंकि भविष्य में इनकी कीमतों में काफी इजाफा होना तय है।
इस तरह, वर्क-लाइफ बैलेंस और हाइब्रिड काम ने भारत के रियल एस्टेट के नक्शे को नए सिरे से आकार दिया है, जहां टियर-2 और टियर-3 शहर नए निवेश और जीवन की उम्मीदों के केंद्र बन रहे हैं।
