२० वर्ष की उम्र में प्रग्नानंधा ने नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट में इतिहास रचा है। उन्होंने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में कुल १८ अंक हासिल करते हुए विश्व के शीर्ष खिलाड़ियों वेस्ली सो और अलिरेजा फिरौजजा को पीछे छोड़ते हुए पहली बार इस खिताब को अपने नाम किया।
नॉर्वे शतरंज टाइटल के लिए यह मुकाबला बेहद रोमांचक और कड़ा था, जहां हर चाल निर्णायक साबित हो सकती थी। प्रग्नानंधा की तेजतर्रार रणनीति और सटीक चालों ने उन्हें इस उच्च स्तरीय मुकाबले में मजबूती प्रदान की। उन्होंने निरंतर अपनी स्थिति को मजबूत करते हुए विपक्षी खिलाड़ियों पर दबाव बनाए रखा और अंत में विजेता के रूप में उभरे।
इस उपलब्धि के साथ प्रग्नानंधा भारत के शतरंज इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने में सफल रहे हैं। वे नॉर्वे शतरंज के खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं, जो युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
प्रग्नानंधा की यह सफलता न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा का परिचायक है, बल्कि भारतीय शतरंज के विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उनकी मजबूती का भी सूचक है। वर्तमान में विश्व शतरंज परिदृश्य में भारत के खिलाड़ियों की चमक बढ़ रही है, और प्रग्नानंधा इसके प्रमुख स्तंभों में से एक हैं।
उन्होंने इस टूर्नामेंट में अपने अभिनय के बारे में कहा, “यह मेरा सबसे बड़ा सपना था और इसे पूरा करना खास अनुभव है। मैं इस सफलता को अपने परिवार, कोच और सभी समर्थकों को समर्पित करता हूं।”
भारतीय शतरंज जगत और फैंस के लिए यह गर्व और खुशी का पल है। प्रग्नानंधा के इस प्रदर्शन से युवाओं के मनोबल को नई उड़ान मिलेगी और वे भी विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित होंगे।
नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट में शामिल वेस्ली सो और अलिरेजा फिरौजजा जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी प्रग्नानंधा की कामयाबी की गवाही देते हैं, जिसने साबित किया कि वह भविष्य के विश्व चैंपियन बनने की क्षमता रखते हैं। यह प्रतियोगिता उनके करियर के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

