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महाराष्ट्र के मंगाव गांव में आश्रित महिलाओं और उनके बच्चों के लिए एक अनूठा पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया है। डॉ. राजेंद्र और डॉ. सुचेता धमाने द्वारा स्थापित यह केंद्र 477 महिलाओं और 43 बच्चों को सुरक्षित आवास प्रदान करता है। यहां के निवासी न केवल अपने जीवन को पुनर्गठित कर रहे हैं, बल्कि स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर भी बन रहे हैं।

मंगाव का मॉडल अन्य स्थानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनता जा रहा है। यहां महिलाएं एक साथ मिलकर बेकरी चलाती हैं, खेतों का संचालन करती हैं और डेयरी यूनिट्स का प्रबंधन करती हैं। इससे न केवल उन्हें रोजगार मिलता है, बल्कि वे समाज में अपनी एक पहचान भी बना पाती हैं।

डॉ. राजेंद्र धमाने ने बताया, “हमारा मकसद इन महिलाओं को सम्मान और आत्मनिर्भरता देना है। उनकी यह यात्रा कठिन जरूर रही, लेकिन आज वे खुद के संघर्ष की कहानियों की अपनी ही नायिका हैं।”

मंगाव के निवासियों ने हाल ही में बताया कि वे जल्द ही एक हाईवे कैफे शुरू करने वाले हैं, जो न केवल उनके व्यवसाय को बढ़ावा देगा बल्कि यात्रियों को भी ताजगी से भरे उत्पाद उपलब्ध कराएगा। यह पहल पुनर्वास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संस्थाएँ इस पहल का समर्थन कर रही हैं। साथ ही, आसपास के क्षेत्र में भी इस मॉडल को अपनाने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं। मंगाव का यह प्रयास उन सभी महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जिन्हें समाज ने अलग-थलग कर दिया था।

इस अनोखे गांव में महिलाओं और बच्चों का पुनर्वास न केवल उनके जीवन में सुधार ला रहा है, बल्कि यह सामाजिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक कदम है। आने वाले समय में मंगाव का मॉडल अन्य ग्रामीण इलाकों में भी सफल पुनर्वास के लिए मिसाल कायम करेगा।

समाज के सहयोग से, मंगाव के ये महिलाएं अपनी नई जिंदगी की ओर कदम बढ़ा रही हैं जो उनके लिए एक सशक्त और उज्जवल भविष्य की शुरुआत है।

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