अमेरिका, 27 फरवरी 2024: अमेरिकी परिवहन विभाग ने मंगलवार को सुपरसोनिक उड़ानों पर 53 वर्ष पुराने प्रतिबंध को खत्म करने के लिए एक नया नियम जारी किया है, जिससे सुपरसोनिक उड़ानों की वापसी की राह साफ हो गई है। यह कदम नासा के सफल परीक्षण के बाद आया है, जिसमें प्रयोगात्मक X-59 विमान ने ध्वनि की गति से तेज उड़ान भरी, लेकिन बिना तेज ध्वनि विस्फोट (सोनिक बूम) के।
यह नया नियम अमेरिकी संघीय विमान प्रशासन (FAA) द्वारा लागू किया गया है, जो अब सुपरसोनिक विमान की उड़ानों के लिए ध्वनि विस्फोट को नियंत्रित करने वाले पुराने कड़े प्रतिबंधों में बदलाव करता है। FAA के अनुसार, इस नियम से विमानन उद्योग में नई तकनीकों के विकास को बढ़ावा मिलेगा जिनसे हवाई यात्रा अधिक तेज, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल हो सकेगी।
NASA के X-59 विमान ने सुपरसोनिक उड़ान के दौरान जो खास सफलता हासिल की है, वह इस परिवर्तन का मुख्य कारण है। इस विमान ने खास डिजाइन द्वारा ध्वनि विस्फोट को कम कर दिया है, जिससे परंपरागत सुपरसोनिक विमानों की तुलना में आस-पास के क्षेत्र में शोर प्रदूषण कम होगा। इस तकनीक के आने से न केवल सैन्य और वैज्ञानिक विमानन क्षेत्र, बल्कि वाणिज्यिक हवाई यात्रा में भी सुपरसोनिक विमान के उपयोग की संभावना बढ़ जाएगी।
यह निर्णय अमेरिकी परिवहन विभाग द्वारा पर्यावरण और नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पुराने नियमों के तहत सुपरसोनिक उड़ानों पर पाबंदी थी क्योंकि उन्हें उड़ान के दौरान तेज ध्वनि विस्फोट के कारण नागरिक इलाकों में उड़ान भरने से रोका गया था। लेकिन अब इस नियम के बदलाव से विमानन कंपनियां ऐसी उड़ानें चालू कर सकेंगी जो तेज होने के साथ-साथ कम शोरदायक होंगी।
FAA के विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि इस नियम बदलाव से अमेरिका में सुपरसोनिक विमान बनाने वाली कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी और उच्च तकनीक विमानन क्षेत्र में नई नौकरियों के अवसर भी बनेंगे। इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए भी नए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
सुपरसोनिक उड़ानों में वापसी का यह फैसला वैश्विक हवाई यात्रा के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीकी प्रगति आर्थिक और पर्यावरणीय तौर पर दोनों ही दिशाओं में सकारात्मक प्रभाव डालेगी। नई तकनीक के कारण, भविष्य में यात्रियों को अब न केवल तेज यात्रा मिलेगी, बल्कि उड़ान के दौरान न्यूनतम शोर प्रदूषण का सामना करना होगा।
इस नियम के लागू होने से उम्मीद की जा रही है कि कई विमान निर्माता अगली पीढ़ी के सुपरसोनिक विमान विकसित करने में तेजी लाएंगे, जिससे अमेरिका फिर से विश्व के सुपरसोनिक विमानन के अग्रणी देश के रूप में उभरेगा।

