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लंदन: पीएमओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) से प्रभावित महिलाओं की संख्या यूके में लाखों में है, लेकिन इसके निदान और प्रबंधन में अभी भी कमी देखी जा रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है और इसके इलाज में असमानता पाई जाती है।

पीएमओएस महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन का कारण बनता है, जिससे अनियमित मासिक चक्र, वजन बढ़ना, मुंहासे, और बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ब्रिटेन के एक प्रमुख स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कई महिलाओं तक इस बीमारी की सही जानकारी और उपचार सुविधाएं पहुंच नहीं पा रही हैं, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

स्वास्थ्य निगरानी संस्था ने रिपोर्ट में जोर देकर कहा है कि पीएमओएस से पीड़ित महिलाओं को एनएचएस (नेशनल हेल्थ सर्विस) के तहत वार्षिक जांच करानी चाहिए, ताकि उनकी स्थिति की सही निगरानी हो सके और समय पर उचित इलाज प्रदान किया जा सके। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि नियमित चेकअप से इस स्थिति से जुड़ी गंभीर जटिलताओं जैसे टाइप 2 डायबिटीज, दिल की बीमारी और हार्मोनल विकारों को रोका जा सकता है।

डॉक्टर अंजली वर्मा, जो लंदन के एक प्रमुख अस्पताल में महिलाओं के स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख हैं, ने कहा, “पीएमओएस के बारे में जागरूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है। कई बार महिलाओं को सही समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिसका प्रभाव उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत पर पड़ता है। NHS में वार्षिक जांच को अनिवार्य बनाना इस समस्या का सुनिश्चित समाधान हो सकता है।”

हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि पीएमओएस का बेहतर प्रबंधन केवल मेडिकल परीक्षणों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। महिलाओं को जीवनशैली में बदलाव, पोषण पर ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझाकर इस बीमारी से लड़ने में मदद मिल सकती है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने फिलहाल यह पुष्टि नहीं की है कि NHS में पीएमओएस वार्षिक जांच कब से लागू होगी, लेकिन यह बात स्पष्ट है कि इस दिशा में कदम उठाना आवश्यक है। विशेषज्ञ और स्वास्थ्य कार्यकर्ता मिलकर इस दिशा में जोर दे रहे हैं ताकि सभी प्रभावित महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और जीवन स्तर मिल सके।

पीएमओएस से जुड़ी जागरूकता में सुधार, बेहतर हेल्थ सर्विसेज और नियमित जांच के माध्यम से यूके में महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है। इस प्रयास से न केवल उनकी शारीरिक परेशानियां कम होंगी, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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