कश्मीर में सेब उत्पादकों की चिंताएं बढ़ती लागत और कमजोर बाजार में मुनाफे को लेकर
श्रीनगर। कश्मीर के सेब उत्पादक इस वर्ष सीए (कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर) स्टोरेज की व्यवहार्यता को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। उन्हें कहना है कि इस तकनीक में होने वाला अतिरिक्त खर्च उनकी आय को संतोषजनक रूप से बढ़ाने में असमर्थ रहा है। उद्यानिकी विभाग और विभिन्न कृषि विशेषज्ञों की सलाह के बावजूद, बढ़ती लागत और कमजोर बाजार भाव ने उत्पादकों की उम्मीदों को ठेस पहुंचाई है।
किसानों के मुताबिक, सीए स्टोरेज तकनीक से सेब को लंबे समय तक ताजा रखने में मदद मिलती है, जिससे वे उपज को बाद के समय में बेच कर बेहतर दाम प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया में बिजली, रखरखाव और अन्य परिचालन खर्चे काफी बढ़ गए हैं। इस कारण कुल खर्च में इजाफा हुआ है, जबकि बाजार में सेब के भाव अपेक्षाकृत कम बने हुए हैं।
श्रीनगर के एक अनुभवी सेब उत्पादक इरफान अहमद ने बताया, “इस बार लागत इतनी ज्यादा हो गई है कि अंत में हमें जो मुनाफा होता है, वह काफी कम हो गया है। कई साथी किसान तो सीए स्टोरेज सुविधा का उपयोग करने से भी कतराने लगे हैं।” उन्होंने कहा कि यदि कीमतों में सुधार नहीं हुआ, तो उत्पादक किसान इस तकनीक को अपनाने से निराश हो सकते हैं।
इस समस्या पर कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि सरकार और संबंधित विभागों को उत्पादकों को वित्तीय सहायता प्रदान करनी होगी और बाजार में उचित मूल्यों को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने होंगे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि किसानों के लिए बेहतर सीए स्टोरेज तकनीक और ऊर्जा-कुशल उपकरणों का विकास किया जाए ताकि लागत कम हो सके।
कश्मीर में सेब का उत्पादन क्षेत्र आर्थिक रूप से कई परिवारों का प्रमुख सहारा है। ऐसे में मुनाफे में गिरावट ने स्थानीय समुदाय की आर्थिक स्थिरता पर असर डाला है। उत्पादक उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कदम उठाएगी ताकि उनकी मेहनत और निवेश सुरक्षित रह सके।
कुल मिलाकर, इस वर्ष के परिणाम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सीए स्टोरेज के फायदे तब तक पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाएंगे जब तक बाजार भाव और लागत में संतुलन नहीं बनाया जाएगा। जो हालात बन रहे हैं, वे कश्मीर के सेब उद्योग के लिए एक चुनौतीपूर्ण दौर की ओर इशारा कर रहे हैं।

