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ईएसआईसी ने नए अस्पताल सीधे चलाने का फैसला क्यों किया: पश्चिम बंगाल की ट्रिगर
As countries urbanise, 38% of world's population will live in large cities by 2100: Study
जैसे-जैसे देश शहरीकरण की ओर बढ़ेंगे, 2100 तक दुनिया की 38% आबादी बड़े शहरों में रहेगी: अध्ययन
'Disbelief' in India camp after a failure to adapt to 'fantastic' Ireland
भारत के कैंप में ‘आश्चर्य और असमंजस’ ने लिया जन्म, ‘शानदार’ आयरलैंड के खिलाफ अनुकूलन में नाकामी
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सिर्फ 10.2% महिलाएं ही मैदान में उतरीं, 2023 में महिला विधेयक पारित होने के बाद 20 विधानसभा चुनावों में: रिपोर्ट
Through The Magnificent Life, artist Rajesh RV imagines a world of harmony and hope
महान जीवन के माध्यम से, कलाकार राजेश आरवी ने सौहार्द और उम्मीद की दुनिया की कल्पना की
Ancient Aaykkudi Temple Discovered in Vizhinjam | Kerala Temple History
विजीनजं में प्राचीन अय्यकुडी मंदिर की खोज | केरल मंदिर इतिहास
It’s a bad idea to scratch bug bites, research says
कीट के काटने पर खुजलाना एक गलत कदम है, शोध में बताया गया
What decides your height?
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Why is pregnancy sickness drug not easily accessible to all?
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Experts flag ecological, privacy concerns over drone deployment for wildlife monitoring

केरल वन विभाग ने बताया है कि वे ड्रोन का उपयोग केवल वन्यजीवन की निगरानी के लिए करते हैं, लेकिन विशेषज्ञ इस मामले में सावधानियां बरतने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि ड्रोन के उपयोग से वन्यजीवों के व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और साथ ही लोगों की निजता का भी उल्लंघन हो सकता है।

केरल के घने जंगलों में ड्रोन तकनीक ने वन्यजीवन संरक्षण में एक नया आयाम जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया है। वन विभाग का दावा है कि ड्रोन से क्षेत्रीय निगरानी बेहतर होती है और अनियंत्रित शिकार या वन्यजीवन से जुड़ी अन्य गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलती है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि इन तकनीकी उपकरणों की सावधानीपूर्वक और नियंत्रित तैनाती आवश्यक है ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक वातावरण में असंतुलन न हो।

वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. माया पिल्लई के अनुसार, “ड्रोन की तेज़ आवाज़ और अचानक उड़ान से जानवरों में तनाव पैदा हो सकता है, जो उनके प्राकृतिक व्यवहार में बदलाव ला सकता है। इससे शिकार करने की आदतों में बदलाव, प्रजनन के समय असमंजस, और यहां तक कि प्रवास के रास्तों में भी बदलाव आ सकता है।” उन्होंने सुझाव दिया कि ड्रोन उड़ाने के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार किए जाएं, जिनमें उड़ान की ऊँचाई, समय और आवृत्ति की सीमाएं शामिल हों।

वहीं, गोपनीयता के मुद्दे भी गंभीर चिंता का विषय हैं। ड्रोन कैमरे द्वारा रिकॉर्ड की गई वीडियो और छवियों का दुरुपयोग संभव है, जिससे स्थानीय लोगों की निजता खतरे में पड़ सकती है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से अनुरोध किया है कि वे नियम बनाएं जो ड्रोन यात्राओं और डेटा संग्रहण की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करें।

वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी श्री अनूप कुमार ने कहा, “हम पूरी सावधानी के साथ ड्रोन का उपयोग कर रहे हैं। हमारा मकसद केवल वन्यजीवन संरक्षण है। हम विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखकर सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक सुदृढ़ करेंगे ताकि पर्यावरण और स्थानीय समुदाय दोनों की सुरक्षा हो सके।”

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बेहतर प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के बिना ड्रोन तकनीक के उपयोग से अधिक नुकसान हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया है कि सरकारी और गैर-सरकारी संगठन मिलकर वन्यजीव संरक्षण के लिए ड्रोन उड़ाने के नियमावली तैयार करें और नियमित समीक्षा करें।

इस प्रकार, केरल में वन्यजीवन संरक्षण के लिए ड्रोन का उपयोग एक प्रगति है, लेकिन इसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को नजरअंदाज करना खतरे से खाली नहीं है। उचित नियम और पारदर्शिता के बिना यह तकनीक विवादों को जन्म दे सकती है, इसलिए विशेषज्ञों की सलाह है कि संतुलित और जिम्मेदार तरीके से ही इसका उपयोग किया जाना चाहिए।

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