गुजरात के लोथल में स्थित राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर (National Maritime Heritage Complex) की स्थापना तेजी से प्रगति पर है। इस प्रोजेक्ट को प्रसिद्ध वास्तुकार हाफ़ीज़ कॉन्ट्रैक्टर द्वारा डिजाइन किया गया है, जो हरप्पन सभ्यता की वास्तुकला, आधुनिक गैलेरी प्रदर्शनी और टिकाऊ डिजाइन को मिलाकर लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में फैला है। यह परियोजना भारत के समुद्री इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करने का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।
राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर का उद्देश्य भारतीय समुद्री परंपराओं, व्यापार, समुद्री अभियानों और समुद्री विज्ञान के विकास को प्रदर्शित करना है। लोथल, जो प्राचीन हरप्पन सभ्यता का एक महत्वपूर्ण बंदरगाह था, इसे इस परिसर की स्थापना के लिए स्थान बनने का विशेष महत्व मिलता है। परियोजना में हरप्पन युग की वास्तुकला की झलक आधुनिक तकनीकों के साथ प्रस्तुत की जाएगी, जिससे आगंतुकों को उस युग का सही अनुभव मिल सकेगा।
इस परिसर में विभिन्न सागर संबंधी गैलरी, संग्रहालय, और शैक्षिक केंद्र शामिल होंगे। यह गैलरियां भारतीय समुद्री इतिहास की विभिन्न परतों को समझाने में मदद करेंगी, जैसे कि प्राचीन समुद्री व्यापार मार्ग, नौकाओं के प्रकार, समुद्री युद्धों की रणनीति और पारंपरिक समुद्री जीव-विज्ञान। इसके अतिरिक्त, परिसर में स्थायी प्रदर्शनी की व्यवस्था की जाएगी जिसमें समुद्री साधनों, समुद्री जीवों और पारंपरिक समुद्री कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को ध्यान में रखते हुए, इस परियोजना में सबसे नवीन ईको-फ्रेंडली तकनीकों का प्रयोग किया गया है। परियोजना स्थल की योजना इस प्रकार तैयार की गई है कि प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित किया जा सके और ऊर्जा की बचत हो। इसका मकसद केवल एक पर्यटन स्थल विकसित करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा केंद्र बनाना है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए समुद्री विरासत के संरक्षण में सहायक हो।
सरकार ने इस परियोजना को राष्ट्रीय सांस्कृतिक समृद्धि के लिए एक मील का पत्थर माना है। इसके अलावा, इस परिसर के बनने से गुजरात में पर्यटन को भी एक बड़ा बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूती प्राप्त करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर देश में समुद्री इतिहास के प्रति जन जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।
समाप्त करते हुए, कहा जा सकता है कि नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स भारतीय इतिहास और संस्कृति के साथ-साथ वास्तु कला और पर्यावरण संरक्षण का समन्वय प्रस्तुत करने वाला एक अद्वितीय केंद्र बनने जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह परिसर लाखों पर्यटकों, शोधकर्ताओं और समुद्री इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।

