भोपाल। ओड़िशा सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं के लिए गुणवत्ता युक्त शिक्षा को अधिक सुलभ, समान और किफायती बनाना है। इस योजना के तहत, आगामी पांच वर्षों में केजी से पीजी तक की शिक्षा के लिए कुल ₹5,467 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि योग्य छात्र जो सरकार द्वारा संचालित या सहायता प्राप्त संस्थानों में नियमित मोड में प्रवेश लेते हैं, उन्हें पूरी तरह से प्रवेश शुल्क से छूट दी जाएगी। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि आर्थिक बाधाएं किसी भी बच्चे के शिक्षा ग्रहण करने के रास्ते में बाधक न बनें।
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य विशेष रूप से उन परिवारों के बच्चों को लाभ पहुंचाना है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। सरकार का मानना है कि शिक्षा को सशक्त बनाने से ही समाज में समग्र विकास संभव है। इस योजना के अंतर्गत प्राथमिक से उच्चतर शिक्षा तक व्यापक सुधार एवं सहायता प्रदान की जाएगी।
ओड़िशा के शिक्षा मंत्री ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि शिक्षा के क्षेत्र में कोई भी बच्चा पीछे न रह जाए। मुफ्त शिक्षा देना शिक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे विद्यार्थियों की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा वे बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे।”
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यावहारिक और व्यापक योजनाएं न केवल बच्चों को शिक्षित करेंगी बल्कि प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को भी बढ़ावा देंगी। इसके अलावा, इस कदम से शिक्षा के क्षेत्र में समानता आएगी और सभी वर्गों के बच्चों को अवसर मिलेंगे।
वर्तमान में, ओड़िशा सरकार ने अपने विभिन्न शहरी और ग्रामीण इलाकों में सरकार संचालित स्कूलों और महाविद्यालयों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता में सुधार के लिए भी कई कदम उठाए हैं। इस नई योजना का क्रियान्वयन छात्रों के प्रवेश से ही प्रारंभ होगा, जिससे उन्हें तत्काल लाभ मिलेगा।
सरकार की यह पहल निस्संदेह राज्य के शैक्षिक ढांचे को सशक्त बनाएगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा के दरवाजे और अधिक व्यापक रूप से खोलेगी। विभाग ने कहा है कि वे निरंतर योजना के प्रभावों का आकलन करेंगे और आवश्यकतानुसार इसमें सुधार भी करेंगे।

